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टुकड़ो की जिंदगी

4.3
848

जिंदगी बस उतनी ही है जितनी बच जाती है प्याली में चाय या फिर बच जाता है सिगरेट का जो हिस्सा पूरी तरह पी लेने के बाद बस उतनी ही तो होती है जिंदगी मेरे और तुम्हारे पास बाँट लेने को अपना-अपना किस्सा । जी ...

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लेखक के बारे में
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अभिजीत साहू
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Mukund Verma
    13 ऑक्टोबर 2015
    बहुत खूब। ज़िन्दगी सच में उतनी ही है जितनी आपने बताई है। अदभूत।
  • author
    मुकेश प्रसाद
    12 ऑक्टोबर 2015
    सही में उतना ही वक्त काफी होता है . . . सुभकामनाऐ अभिजित जी . 
  • author
    14 डिसेंबर 2018
    बहुत ही सही कहा है आपने
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    Mukund Verma
    13 ऑक्टोबर 2015
    बहुत खूब। ज़िन्दगी सच में उतनी ही है जितनी आपने बताई है। अदभूत।
  • author
    मुकेश प्रसाद
    12 ऑक्टोबर 2015
    सही में उतना ही वक्त काफी होता है . . . सुभकामनाऐ अभिजित जी . 
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    14 डिसेंबर 2018
    बहुत ही सही कहा है आपने