कभी किसी रोज बारिश की शाम में भींगकर आकाश का अंधेरा भारी हो रहा होगा तब तुम लिख रहे होंगे कोई प्रेम कविता उसी खिड़की के पास जहां तेज बारिश में आ ही जाती थी फुहार, उस फुहार से भींगती तुम्हारी पीठ पर...
आपकी इस कविता रूपी बारिश ने तो मेरा तन मन भिगो दिया...आपके गीले हाथ मुझे अपने हाथों में महसूस हो रहे हैं... आपने आस पास भीगी फ़िज़ाओं को महसूस कर रहा हूँ जबकि तेज़ गर्मी और धूप का आलम है ।
कविता क्या है जी...मानो मेरे चेहरे और मेरे जिस्म को रह रह के आपके लफ़्ज़ों की फुहारे छू रही हैं । ये मुहब्बत की बड़ी खास नज़्म है । और इस खूबसूरत नज़्म को मैं सलाम करता हूँ ।
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
आपकी इस कविता रूपी बारिश ने तो मेरा तन मन भिगो दिया...आपके गीले हाथ मुझे अपने हाथों में महसूस हो रहे हैं... आपने आस पास भीगी फ़िज़ाओं को महसूस कर रहा हूँ जबकि तेज़ गर्मी और धूप का आलम है ।
कविता क्या है जी...मानो मेरे चेहरे और मेरे जिस्म को रह रह के आपके लफ़्ज़ों की फुहारे छू रही हैं । ये मुहब्बत की बड़ी खास नज़्म है । और इस खूबसूरत नज़्म को मैं सलाम करता हूँ ।
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या