“लतिका देखो, ये माला टूट गयी बस एक ही मोती समेट पायी मेरी बूढ़ी आंखें। बाक़ी सारे मोती तो यहाँ-वहाँ बिखर गए।" टूटी हुई माला के धागे के साथ और हाथ में एक मोती लिए माँ (शशि प्रभा) ने कमरे में ...
मां का निर्णय मुझे बिल्कुल सही लगा, जब बच्चों की बात आई,तब मां ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई थी। जब बच्चों की बात आई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को बोझ समझकर उससे किनारा कर लिया था। बेहतरीन रचना।
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मां का निर्णय मुझे बिल्कुल सही लगा, जब बच्चों की बात आई,तब मां ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई थी। जब बच्चों की बात आई, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को बोझ समझकर उससे किनारा कर लिया था। बेहतरीन रचना।
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