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तेरी मोहब्बत

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फिसलते वक्त से कुछ लम्हे संजोए रखें है हमने। यादों के संदूक में वो मोती से चमकते आज भी है।। गुल का खिलना,महकना, और बिखरना है दस्तूर मगर। एहसास हो जिंदा तो सूखे गुलाब महकते आज भी है।। एक जमाना हुआ ...

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लेखक के बारे में
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Jyoti Shrivastava
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dhanush "Khalish"
    01 जुलाई 2021
    बेहद खूबसूरत लिखा ज्योति जी। हरेक मिसरा लाजवाब। आपकी इसी कृति के रदीफ से यही कहेंगे कि....... कश म कश रही ज़ुबां, इकरारे मुहब्बत कर न सके वो गर आ जाए सामने तो लब लरजते आज भी हैं
  • author
    12 दिसम्बर 2021
    आपकी ये रचना बहुत ही अच्छी, सुंदर एवं मनभावन है,पढ़ कर दिल खुश हो गया।आप इतनी अच्छी दिल को छू लेनेवाली कविता भी लिखती हूँ, पता नहीं था। बधाई के साथ धन्यबाद।
  • author
    UMA SHARMA "अर्तिका"
    01 जुलाई 2021
    वाह बहुत खूब शानदार शब्दों में मनोभावों को अभिव्यक्ति किया है सुन्दर लेखन 👌👌👌
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    Dhanush "Khalish"
    01 जुलाई 2021
    बेहद खूबसूरत लिखा ज्योति जी। हरेक मिसरा लाजवाब। आपकी इसी कृति के रदीफ से यही कहेंगे कि....... कश म कश रही ज़ुबां, इकरारे मुहब्बत कर न सके वो गर आ जाए सामने तो लब लरजते आज भी हैं
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    12 दिसम्बर 2021
    आपकी ये रचना बहुत ही अच्छी, सुंदर एवं मनभावन है,पढ़ कर दिल खुश हो गया।आप इतनी अच्छी दिल को छू लेनेवाली कविता भी लिखती हूँ, पता नहीं था। बधाई के साथ धन्यबाद।
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    UMA SHARMA "अर्तिका"
    01 जुलाई 2021
    वाह बहुत खूब शानदार शब्दों में मनोभावों को अभिव्यक्ति किया है सुन्दर लेखन 👌👌👌