फिसलते वक्त से कुछ लम्हे संजोए रखें है हमने। यादों के संदूक में वो मोती से चमकते आज भी है।। गुल का खिलना,महकना, और बिखरना है दस्तूर मगर। एहसास हो जिंदा तो सूखे गुलाब महकते आज भी है।। एक जमाना हुआ ...
बेहद खूबसूरत लिखा ज्योति जी। हरेक मिसरा लाजवाब। आपकी इसी कृति के रदीफ से यही कहेंगे कि.......
कश म कश रही ज़ुबां, इकरारे मुहब्बत कर न सके
वो गर आ जाए सामने तो लब लरजते आज भी हैं
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
आपकी ये रचना बहुत ही अच्छी, सुंदर एवं मनभावन है,पढ़ कर दिल खुश हो गया।आप इतनी अच्छी दिल को छू लेनेवाली कविता भी लिखती हूँ, पता नहीं था। बधाई के साथ धन्यबाद।
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
बेहद खूबसूरत लिखा ज्योति जी। हरेक मिसरा लाजवाब। आपकी इसी कृति के रदीफ से यही कहेंगे कि.......
कश म कश रही ज़ुबां, इकरारे मुहब्बत कर न सके
वो गर आ जाए सामने तो लब लरजते आज भी हैं
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
आपकी ये रचना बहुत ही अच्छी, सुंदर एवं मनभावन है,पढ़ कर दिल खुश हो गया।आप इतनी अच्छी दिल को छू लेनेवाली कविता भी लिखती हूँ, पता नहीं था। बधाई के साथ धन्यबाद।
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या