pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

तेरा तुझ पर काबू नहीं

4.1
417

क्या गजब मेरे हिस्से में तेरी खामोशियाँ ही सही जानता हूँ बोलती आँखों पर तेरा कोई काबू नहीं ये जो सियासी बाँकपन है बाकी जम्हूरियत सही है तभी तक महफूज आवाम जब तक बेकाबू नहीं मुफीद नहीं वज्म में ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

मँजी हुई शर्म का जनतंत्र के (कविता संकलन) साहित्य समाज और जनतंत्र (लेख संकलन) बाजारवाद और जनतंत्र (लेख संकलन) आजादी और राष्ट्रीयता का मतलब (लेख संकलन) छुटे हुए क्षण (जीवनानुभव) कई पुस्तकों के सहलेखक विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। संप्रति नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता में कार्यरत। संपर्क : [email protected] मोबाइल : 919007725174

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    AnshuPriya Agrawal
    20 जुलाई 2020
    बहुत ही बेहतरीन बहुत ही उम्दा👌👌
  • author
    Mahendra Prajapati
    04 अगस्त 2023
    great 👌👌
  • author
    Manjit Singh
    14 अगस्त 2020
    आनंद दायक
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    AnshuPriya Agrawal
    20 जुलाई 2020
    बहुत ही बेहतरीन बहुत ही उम्दा👌👌
  • author
    Mahendra Prajapati
    04 अगस्त 2023
    great 👌👌
  • author
    Manjit Singh
    14 अगस्त 2020
    आनंद दायक