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ताशकंद समझौता

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(भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान शास्त्री जी ने नारा दिया था जय जवान जय किसान "अंग्रेजी: हेल द सोल्जर, हेल द फार्मर") 'करो या मरो' जो गांधी जी का नारा था शास्त्री जी ने जनता के सामने 'मरो नहीं मारो’ का ...

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लेखक के बारे में
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प्रवीन

ISBN : 978-81-908310-4-8 Registered in : 2010 Published Books - जिंदगी एक संघर्ष (2010), रविंद्र नाथ टैगोर की कहानीयां (संकलन)(2012), पंडित जय शंकर प्रसाद के किस्से (संकलन) (2015) ना अहम, ना वहम । गलत को गलत कहता हूँ। दुनिया को खुश रखने के लिये मै गलत को सही नही बता सकता, बस यही कारण है मै अकेला रह जाता हूंँ। साथ रहने की किमत झूठ बोल कर खुश रहना है तो मैं अकेला ही अच्छा हूँ। मुद्दे उठाना मेरा काम है राष्ट्रवादी हूँ किसी भी पार्टी का पालतू 🐕‍🦺 नहीं । अभिव्यक्ति की आजादी का सदुपयोग करता हूँ और सिखाता हूँ। मेरे लिखने पर मेरी मात्राओं पर मत जाना क्योंकि मैं शब्दों से नहीं अरमानों से लिखा करता हूँ । इसलिए आप मात्रा वाले हो तो अपनी मात्रा नहीं मिल सकती सिर्फ दिल वाले आना मेरी गली। प्रार्थना में याद रखना ❤️💞🌹

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    डॉ सुनीता गौतम
    02 अक्टूबर 2022
    🙏🙏🙏🙏 उत्कृष्ट अभिव्यक्ति
  • author
    neha sharma
    03 अक्टूबर 2022
    बेहतरीन रचना
  • author
    मीठी Rani "रानी"
    02 अक्टूबर 2022
    nice 👌👌👌👌👌👌👌
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  • author
    डॉ सुनीता गौतम
    02 अक्टूबर 2022
    🙏🙏🙏🙏 उत्कृष्ट अभिव्यक्ति
  • author
    neha sharma
    03 अक्टूबर 2022
    बेहतरीन रचना
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    मीठी Rani "रानी"
    02 अक्टूबर 2022
    nice 👌👌👌👌👌👌👌