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तन के घाव

4.1
855

तन के सारे घावों को मन के सारे भावों से भरना हमको आता है जीने का सलीका सिख रहा हूँ पर मरना हमको आता है यूँ तो चाहता हूँ की डूब जाऊँ कमवक्त! तैरना हमको आता है तन के सारे घावों को मन के सारे भावों ...

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लेखक के बारे में
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अंजय सिंह

मिजाज़ से शायर.....

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Vaibhav Chaudhary
    10 जनवरी 2021
    गागर में सागर वाली बात बोली
  • author
    Heena Mishra
    31 जुलाई 2020
    bhut hi umda panktiyan hai ..
  • author
    Adv.Rushikesh Kalwaghe
    27 अप्रैल 2020
    too gooooddddd 👍👍
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  • author
    Vaibhav Chaudhary
    10 जनवरी 2021
    गागर में सागर वाली बात बोली
  • author
    Heena Mishra
    31 जुलाई 2020
    bhut hi umda panktiyan hai ..
  • author
    Adv.Rushikesh Kalwaghe
    27 अप्रैल 2020
    too gooooddddd 👍👍