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तलाश

4.6
362

पाषाण जैसी जिन्दगी नरम घास कहाँ तलाश करुँ सर्द अंधेरी रात है, सूर्य -किरण कहाँ तलाश करुँ रिसता है घाव बहुत गहरा हंसने के बहाने कहाँ तलाश करुँ नदियों में गटरों का गन्दा जल पतित पावनी ...

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लेखक के बारे में
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बसंत राघव
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    .
    15 जनवरी 2021
    very nice sir
  • author
    विकास कुमार
    18 मई 2018
    वाह उत्कृष्ट कृति | मै आपको अपनी रचना "तू कौन " पढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ , धन्यवाद | https://hindi.pratilipi.com/story/तू-कौन-4GiIbMMDJuGf
  • author
    अल्पज्ञ
    01 जुलाई 2023
    मन की व्यथा को, शब्दों में पिरोकर एक उत्कृष्ट रचना का आविर्भाव हुआ है। बहुत खूब!
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    .
    15 जनवरी 2021
    very nice sir
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    विकास कुमार
    18 मई 2018
    वाह उत्कृष्ट कृति | मै आपको अपनी रचना "तू कौन " पढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ , धन्यवाद | https://hindi.pratilipi.com/story/तू-कौन-4GiIbMMDJuGf
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    अल्पज्ञ
    01 जुलाई 2023
    मन की व्यथा को, शब्दों में पिरोकर एक उत्कृष्ट रचना का आविर्भाव हुआ है। बहुत खूब!