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तलाक जिन्दगी से नहीं

4.5
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दिन के दस बज चुके थे, लाखों मजदूर अपने-अपने काम पर आ चुके थे मगर सूरत के उद्योगपति सेठ गोविन्द देसाई का बेटा जतिन अभी तक खर्राटे भर रहा था। तभी बहन आशा कमरे में आई और पुकारा-"जतिन...ओ जतिन, उठो ...

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समीक्षा
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  • author
    Deepak Kumar
    22 मई 2018
    मुझे तो उन लड़कों के माँ बाप पर सोच आती है,जिनको ये पता होते हुए भी की उनका लड़का गलत आदतों में है फिर भी उसको शादी ये सोच कर करा देते है कि उनका लड़का जिम्मेदारी समझेगा ओर सुधार जाएगा,,एक बार भी उस लड़की के बारे में नही सोचते कि को लोग उस लड़की की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ नही कर रहे है।।।
  • author
    Savita Singh
    22 मई 2018
    समाज की कड़वी सच्चाई है ये। माँ बाप बस अपने बेटे के बारे में सोचते हैं और एक बेटी की जिंदगी तबाह हो जाती है।
  • author
    AnshuPriya Agrawal
    05 मार्च 2020
    बहुत सुंदर कहानी कथावस्तु बहुत ही सार्थक, हर पात्र बहुत सजीवता से गढ़े गए हैं, मानों कोई चलचित्र चल रही हो, 🙏🙏 👌👌🙏💐 आपकी प्रशंसा के लिए और बधाई देने के लिये शब्दों की कमी महसूस कर रही हूँ ..... बहुत बढ़िया बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें
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    Deepak Kumar
    22 मई 2018
    मुझे तो उन लड़कों के माँ बाप पर सोच आती है,जिनको ये पता होते हुए भी की उनका लड़का गलत आदतों में है फिर भी उसको शादी ये सोच कर करा देते है कि उनका लड़का जिम्मेदारी समझेगा ओर सुधार जाएगा,,एक बार भी उस लड़की के बारे में नही सोचते कि को लोग उस लड़की की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ नही कर रहे है।।।
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    Savita Singh
    22 मई 2018
    समाज की कड़वी सच्चाई है ये। माँ बाप बस अपने बेटे के बारे में सोचते हैं और एक बेटी की जिंदगी तबाह हो जाती है।
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    AnshuPriya Agrawal
    05 मार्च 2020
    बहुत सुंदर कहानी कथावस्तु बहुत ही सार्थक, हर पात्र बहुत सजीवता से गढ़े गए हैं, मानों कोई चलचित्र चल रही हो, 🙏🙏 👌👌🙏💐 आपकी प्रशंसा के लिए और बधाई देने के लिये शब्दों की कमी महसूस कर रही हूँ ..... बहुत बढ़िया बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें