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तडप जब खूब बढ़ जाए

3.5
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गजल तडप जब खूब बढ़ जाए कोई रास्ता न बन पाए, साजन तेरी याद मुझे पल -पल अपने पास बुलाए | तूने मेरी मजबूरी को कभी ध्यान से नही जाना , मन तो बस तेरी ही खुशी संग बेहतरी दोहराए | परिवार संग बीता हर पल हमारी...

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लेखक के बारे में
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रेखा मोहन

मन को छु गई बहुत सी कहानियोँ सोचकर शुरुआत हो गई कुछ छोटी कथाए और निबन्ध और आपसी वार्तालाप को मैगज़ीन में शामिल करने का प्रथम प्रयास है | हमे आशा है आप सबको जरूर पसंद आएगा |

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Rakesh Mohan
    15 अक्टूबर 2015
    Gajal ke behtrren sheyar.nice.
  • author
    Piyush Thakur
    14 अक्टूबर 2015
    good writting.welldone.
  • author
    Manjit Singh
    12 सितम्बर 2020
    मोहब्बतें
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  • author
    Rakesh Mohan
    15 अक्टूबर 2015
    Gajal ke behtrren sheyar.nice.
  • author
    Piyush Thakur
    14 अक्टूबर 2015
    good writting.welldone.
  • author
    Manjit Singh
    12 सितम्बर 2020
    मोहब्बतें