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तअज्जुब से कहने लगे बाबू साहब

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सूप का शायक़ हूँ, यख़नी होगी क्या चाहिए कटलेट, यह कीमा क्या करूँ लैथरिज की चाहिए, रीडर मुझे शेख़ सादी की करीमा, क्या करूँ खींचते हैं हर तरफ़, तानें हरीफ़ फिर मैं अपने सुर को, धीमा क्यों करूँ डाक्टर...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : अकबर हुस्सैन रिज़वी उपनाम : अकबर अलाहाबादी जन्म : 16 नवंबर 1846 देहावसान: 15 फरवरी 1921 भाषा : उर्दू विधाएँ : ग़ज़ल, शायरी अकबर अलाहाबादी उर्दू व्यंग्य के अग्रणी रचनाकारों में से एक हैं, इनके काफी शेरों एवम ग़ज़लों में सामाजिक दर्द को सरल भाषा में हास्यपूर्क ढंग से उकेरा गया है। "हंगामा है क्यूं बरपा" इनकी मशहूर ग़ज़लों में से एक है

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shahnawaz Maind
    13 November 2024
    nice
  • author
    Aasiya Wajid
    15 July 2023
  • author
    Rukhsana Hakeem
    12 January 2023
    😊
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    Shahnawaz Maind
    13 November 2024
    nice
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    Aasiya Wajid
    15 July 2023
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    Rukhsana Hakeem
    12 January 2023
    😊