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सुरभि

4.3
31611

प्रिय पाठको/मित्रो, मेरी इस नई कहानी सुरभि को शुरू करने से पहले मै आप लोगो कोबताना चाहूंगा की अगर मेरी इस कहानी को बेहतर ढंग से आप समझनाचाहते है तो आप मेरी पहली कहानी "कच्चा रास्ता" अवश्य पड़े, आप ...

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लेखक के बारे में
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Pankaj Shukla

" कच्चा लेखक हूँ, पका दूंगा या पक जाऊँगा"  I am Pankaj Shukla, an entrepreneur and a part time casual writer. I have many hobbies and reading is one of them. I started writing for the first time in December 2018, my first story "Kachcha Rasta" posted on "Pratilipi" dated 19 February 2019.(It was the beginning of my writing journey) Your views, comments, stricture are highly appreciated, You may also share your views and comments via below social media handles: Instagram pankaj_kaustubhi Twitter- forever_pankaj

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    07 अप्रैल 2019
    पंकज जी, आपकी 'कच्चा रास्ता' पढ़ी थी, बहुत अच्छी लगी थी। कहानी का यह हिस्सा भी रोचक है लेकिन घटनाओं की अस्वाभाविकता कुछ अखरती है। आकांक्षा का पहली ही मुलाकात में सुरभि से इतना खुल जाना तथा एक बार धोखा खाकर भी सुरभि का पुनः अमित पर भरोसा कर उसके साथ long drive के लिए बेहिचक तैयार हो जाना कुछ नाटकीय लगता है। आप अपनी प्रतिभा का बेहतर उपयाग कर सकते थे।
  • author
    Hemalata Godbole
    05 फ़रवरी 2021
    पंकज जी , मरे पास बहुत कहा नियां रोज आती हैं समीक्षा हेतु पता नही कौन भेजता है शायद मै ईमानदार समीक्षा देतीहूं इसलिये ।कहा नी अ.च्छीलगी नहीकहूंगी ।एक इतनी पढी और मेच्योर लडकी जो जिम्मेदार पद पर है ,ऐसी नासमझ कैसी? इसी लिये हमारे घरों मे बढती बटी की चिंता और बंधन है क्योंकि कितनी अच्छी लडकीहो दुनिया बुरी है ।लडकियां स्वतंत्र रहें पर सावधान भी । शेर के मुंह खून लगा है फिर भी वो उसके साथ ग ई?,अब इंदौर की लडकियां सक्षम हैं गडबडहोती है पर पुरुषों की हवसके कारण खैर कहा नी मे सही प्रगति करे जल्दबाजी नकरें सुरभि केसमान मेरी बात का बुरा नमाने ।वो भी बहुत बुद्धिमान थी पर लापरवाह शुभचिंतन
  • author
    Shubham Singh
    24 मई 2019
    अमित सहगल जैसे मक्कार पर भरोसा करके सुरभि ने सबसे बड़ी गलती किया और इस कहानी से यह संदेश भी मिलता है आजकल की पीढ़ी को भी ऐसे नीच पापी मकारों से सावधान रहने की आवश्यकता है मार्मिक कहानी ने बेहतरीन संदेश दिया है समाज में खासकर नवयुवतियों कि लिये
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    07 अप्रैल 2019
    पंकज जी, आपकी 'कच्चा रास्ता' पढ़ी थी, बहुत अच्छी लगी थी। कहानी का यह हिस्सा भी रोचक है लेकिन घटनाओं की अस्वाभाविकता कुछ अखरती है। आकांक्षा का पहली ही मुलाकात में सुरभि से इतना खुल जाना तथा एक बार धोखा खाकर भी सुरभि का पुनः अमित पर भरोसा कर उसके साथ long drive के लिए बेहिचक तैयार हो जाना कुछ नाटकीय लगता है। आप अपनी प्रतिभा का बेहतर उपयाग कर सकते थे।
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    Hemalata Godbole
    05 फ़रवरी 2021
    पंकज जी , मरे पास बहुत कहा नियां रोज आती हैं समीक्षा हेतु पता नही कौन भेजता है शायद मै ईमानदार समीक्षा देतीहूं इसलिये ।कहा नी अ.च्छीलगी नहीकहूंगी ।एक इतनी पढी और मेच्योर लडकी जो जिम्मेदार पद पर है ,ऐसी नासमझ कैसी? इसी लिये हमारे घरों मे बढती बटी की चिंता और बंधन है क्योंकि कितनी अच्छी लडकीहो दुनिया बुरी है ।लडकियां स्वतंत्र रहें पर सावधान भी । शेर के मुंह खून लगा है फिर भी वो उसके साथ ग ई?,अब इंदौर की लडकियां सक्षम हैं गडबडहोती है पर पुरुषों की हवसके कारण खैर कहा नी मे सही प्रगति करे जल्दबाजी नकरें सुरभि केसमान मेरी बात का बुरा नमाने ।वो भी बहुत बुद्धिमान थी पर लापरवाह शुभचिंतन
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    Shubham Singh
    24 मई 2019
    अमित सहगल जैसे मक्कार पर भरोसा करके सुरभि ने सबसे बड़ी गलती किया और इस कहानी से यह संदेश भी मिलता है आजकल की पीढ़ी को भी ऐसे नीच पापी मकारों से सावधान रहने की आवश्यकता है मार्मिक कहानी ने बेहतरीन संदेश दिया है समाज में खासकर नवयुवतियों कि लिये