<p>सभी कमरों में ताला लगा था. अभी भी गैलरी में धुप्प अँधेरा था. मैं ध्यान से सुनकर ये जानने का प्रयास करने लगा कि आवाज़ किस कमरे से आ रही है. हर कमरे के सामने खड़े होकर मैंने आवाज़ सुननी शुरू कर दी. ...
नमस्ते,
अपनी रचनाओं के साथ मैं आपके सामने उपस्थित हूँ | मेरी अधिकतर रचनाएँ तब की हैं जब मैं स्कूल या कॉलेज में पढ़ता था | उस समय प्रेम और भावनाएं मुझे बहुत आकर्षित करती थीं, इसलिए मेरी कहानियों और कविताओं में थोडा युवा होते मन की झलक मिलेगी |
आपसे गुजारिश है कि मेरी कहानियों और कविताओं को पढ़ें, इसमें कुछ सुधार की आवश्यकता महसूस हो तो मुझे बताकर बेहतर बनाने में मदद करें |
शुभकामनाओं सहित,
आपका
अतुल कुमार पाण्डेय
सारांश
नमस्ते,
अपनी रचनाओं के साथ मैं आपके सामने उपस्थित हूँ | मेरी अधिकतर रचनाएँ तब की हैं जब मैं स्कूल या कॉलेज में पढ़ता था | उस समय प्रेम और भावनाएं मुझे बहुत आकर्षित करती थीं, इसलिए मेरी कहानियों और कविताओं में थोडा युवा होते मन की झलक मिलेगी |
आपसे गुजारिश है कि मेरी कहानियों और कविताओं को पढ़ें, इसमें कुछ सुधार की आवश्यकता महसूस हो तो मुझे बताकर बेहतर बनाने में मदद करें |
शुभकामनाओं सहित,
आपका
अतुल कुमार पाण्डेय
रिपोर्ट की समस्या
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