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सूखी नदी

4.3
1509

कड़ाके की ठण्ड वाला जनवरी का महीना, राजू अपनी माँ की अस्थियाँ विसर्जन करने संगम इलाहाबाद पहुँचा | वह अभी नाव की ओर बढ़ा ही था कि एक बूढ़ी औरत उसके पीछे हो ली | राजू संगम की धार पर गया और वह किनारे पर ...

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लेखक के बारे में
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लाडो कटारिया

नाम : लाडो कटारिया जन्मतिथि : 01 अप्रैल 1955 जन्मस्थान : गाँव भरथल (द्वारका), दिल्ली शिक्षा : डिप्लोमा आर्ट एंड क्राफ्ट – जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविधालय (नई दिल्ली) सम्प्रति : राजकीय हाई स्कूल सुखराली गुरुग्राम से कला अध्यापिका पद से सेवानिवृत कार्यक्षेत्र : गत कई वर्षों से हिंदी की पत्र पत्रिकाओं में स्वतन्त्र रूप से लेखन कार्य | विभिन्न समाचार पत्रों में लेख, कविता, पत्र लेखन लघु कथाएं एवं कहानियों का प्रकाशन, अनेक पत्र पत्रिकाओं, कई सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं की आजीवन सदस्यता तथा अनेक साहित्यिक गोष्ठियों में प्रतिभागिता, साहित्य सेवा और समाज सेवा | प्रकाशन कहानी संग्रह “आईना” (2014) काव्य संग्रह "शब्द अनुभूति के" (2020) लेखन में : एक लघु कथा संग्रह, एक कहानी संग्रह व एक संस्मरण संग्रह रूचि : अध्ययन, लेखन, शिक्षण, संगीत, बागवानी सामाजिक कार्य : अपने स्तर पर और कई सामाजिक संगठनों के साथ जुड़कर देश-समाज की भलाई के कार्य करते रहना जैसे बिना दहेज़ की शादी की शुरुआत अपने ही घर से, आठवा फेरा, कन्या बचाओ कन्या पढाओ, स्वयं व समाज में बदलाव लाने के प्रयास | पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ, पृथ्वी बचाओ, उर्जा बचाओ और सड़क सुरक्षा, आदि पर रैली निकालना, नुक्कड़ नाटकों द्वारा, गोष्ठी-सभाओं द्वारा लोगों को जागरूक करना | प्राथमिकता : घर और बाहर दोनों क्षेत्रों में बिना रुके, बिना थके, बिना मानसिक तनाव व् बेख़ौफ़ तरीके से प्रतिक्षण काम करते रहना व् आगे बढ़ते जाना ही मेरी प्राथमिकता है | यात्रा : तीन बार यू.एस. के कैलिफ़ोर्निया के फ्रेमोंट में घूमने के लिए यात्रा | वहां से लास वेगास, अलबुकर्क (न्यू मेक्सिको), फीनिक्स, लोस एंजेलिस, सैन फ्रांसिस्को आदि शहरों की घुमाई | निवास : गुडगाँव – 122001 (हरियाणा) इ-मेल – लडाकटरिए@जीमेल.कॉम

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shekhar Bhardwaj
    09 मार्च 2018
    कोई कैसे छोड़ सकता है,अपनी मां को?जानवर भी ऐसा नहीं करते।
  • author
    Jagriti Godara
    17 दिसम्बर 2017
    मां और पिता से बड़ा कोई रिश्ता नहीं है,, कहानी दिल को छू गई
  • author
    Riyaz Ahmad Shibbu
    24 अक्टूबर 2018
    kabhi jao to dekho sach takleef deta h
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    Shekhar Bhardwaj
    09 मार्च 2018
    कोई कैसे छोड़ सकता है,अपनी मां को?जानवर भी ऐसा नहीं करते।
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    Jagriti Godara
    17 दिसम्बर 2017
    मां और पिता से बड़ा कोई रिश्ता नहीं है,, कहानी दिल को छू गई
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    Riyaz Ahmad Shibbu
    24 अक्टूबर 2018
    kabhi jao to dekho sach takleef deta h