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✍️ सच से हारा हुआ मुसाफिर हूं,,

4.9
22

✍️सच से हारा हुआ मुसाफिर हूं,, सच से हारा हुआ मुसाफिर हूं     पाने की तमन्ना,ना खोने का डर क्या फर्क पड़ता है साहेब       मिलेगी अर्थी या मिलेगी कब्र                         ✍️ संजय बिगोवा,, ...

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लेखक के बारे में

मां.. एक ऐसी जुझारू योद्धा होती है.. ख़ुद पर आए लाखों दुःख तो सह जाती है... पर अपनी औलाद पर आए..एक दुःख से भी टूट जाती है... 💥✍️ संजय सागर बिगोवा क्रमशः ,✍️ संजय बिगोवा

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dinesh uniyal "Anahat"
    15 दिसम्बर 2020
    बहुत ही सुन्दर रचना है 👌👌👌👌💐🌺
  • author
    Pappi Jat
    15 दिसम्बर 2020
    बहुत ही सुंदर राम रहिमएकही है ।
  • author
    15 दिसम्बर 2020
    बहुत ही मार्मिक 👌👌🙏🙏🙏
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    Dinesh uniyal "Anahat"
    15 दिसम्बर 2020
    बहुत ही सुन्दर रचना है 👌👌👌👌💐🌺
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    Pappi Jat
    15 दिसम्बर 2020
    बहुत ही सुंदर राम रहिमएकही है ।
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    15 दिसम्बर 2020
    बहुत ही मार्मिक 👌👌🙏🙏🙏