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स्त्री.... कभी स्त्री से परे नहीं होती

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स्त्री.... कभी सकुचाई शरमाई छुईमुई - सी! स्त्री.... कभी हताश परेशान हैरान-सी! स्त्री.... कभी साहस गौरव तेज से भरी! स्त्री....कभी दबी सहमी कुचली हुई! स्त्री.... कभी देह दासी वस्तु-सी! स्त्री.... ...

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लेखक के बारे में
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शिवानी

जीवन परिचय >  नामः शिवानी शर्मा > लेखकीय नाम: शिवानी जयपुर > जन्मः 06 मार्च ,उदयपुर (राजस्थान) > शिक्षाः बी.काम. , मोन्टेसरी डिप्लोमा, जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में पी जी डिप्लोमा > वर्तमान पताः नरेन्द्र नगर,जयपुर > सम्प्रतिः आकाशवाणी जयपुर में एंकर, स्वतन्त्र लेखन एवं अध्यापन > लेखनः बचपन से ही लेखन में रूची,अच्छा लिखना,पढ़ना,संगीत सुनना,घूमना और बच्चों के साथ खेलना तथा समाज से जो अनुभव व अहसास मिले उन्हीं अनुभव व अहसाओं को अपनी कविता/कहानी के माध्ययम से लोगों के दिलों में उतारने की कोशिश करती हूं। > प्रकाशित पुस्तकें 1.आठ साझा संग्रह में प्रकाशन एवं संपादन 2-'कुछ ख्वाब कुछ हकीकत' काव्य संग्रह 2016 (2017 में राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत) 3-'कुछ मत पूछना हम सच कह बैठेंगी' काव्य संग्रह 2019 (किंडल संस्करण) 4-'कबीर जग में जस रहे' कहानी संग्रह 2022 5- 'उदासियों की चिट्ठी' डायरी 2025 >अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और स्थानीय समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और ई मैगज़ीन आदि में कविताएं, कहानियाँ और समसामयिक विषयों पर आलेख निरंतर प्रकाशित एवं पुरस्कृत। > सम्मानः उत्कृष्ट लेखन, कार्यक्रम संयोजन एवं मंच संचालन के लिए अनेक बार सम्मानित > अन्यः 1-1990 से वर्तमान समय तक आकाशवाणी और 2015 से दूरदर्शन पर एंकर 2- 2007-17 तक प्री प्रायमरी अध्यापन में संलग्न 3-"अजमेर पोएट्स कलेक्टिव" साहित्यिक मंच की संस्थापक सदस्य

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sushila Chanani
    19 जून 2020
    स्त्री के विभिन्न रूपों का खूबसूरती से वर्णन किया गया है!संक्षिप्त व सुनियोजित शब्दावली के कारण रचना प्रभावशाली व दिलचस्प हो गयी है।
  • author
    Manjit Singh
    11 अगस्त 2020
    khubsurat kavita. Sigmund Freud me isliye likha ji aurat Ko pehchanna bahut kathin he
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    02 अप्रैल 2023
    स्त्री के विविध रूपों के दर्शन कराती सुन्दर रचना । हार्दिक साधुवाद
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    Sushila Chanani
    19 जून 2020
    स्त्री के विभिन्न रूपों का खूबसूरती से वर्णन किया गया है!संक्षिप्त व सुनियोजित शब्दावली के कारण रचना प्रभावशाली व दिलचस्प हो गयी है।
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    Manjit Singh
    11 अगस्त 2020
    khubsurat kavita. Sigmund Freud me isliye likha ji aurat Ko pehchanna bahut kathin he
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    अरविन्द सिन्हा
    02 अप्रैल 2023
    स्त्री के विविध रूपों के दर्शन कराती सुन्दर रचना । हार्दिक साधुवाद