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सोऽहम् !

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ओम् स्व:! मुझ में, उस में ,और कण-कण में, तेरा ही, बदला-सा वेश है। हरी ओम् नमः स्व:!

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लेखक के बारे में
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शीतल सिंह

"अनजानी कलम".........शीतल सिंह "भविष्य की हिंदी या हिंदी का भविष्य " https://m.youtube.com/channel/UCYfmKAIeCCb_nl0Hu7HmHjg/videos अनजान कवियित्री हैं जो इस जीवन की रफतार मैं कहीं खो गयी हैं , ठीक उसी तरह जैसे हम हिंदी कविताओं के सौंदर्य को भुलाये बैठे हैं। आशा है, किआप इस सफर मैं हमारा साथ ज़रूर देंगें।🙏

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sneha Moahan Ttwari
    11 अक्टूबर 2018
    इन पंक्तियों को पढ़ कर दिल दिमाग में कृष्ण की छवि रेखांकित होती है, बहुत खूब
  • author
    Vinay Singh
    27 सितम्बर 2018
    बहुत खूब
  • author
    Santosh Sharma
    26 सितम्बर 2018
    बहुत खूब
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sneha Moahan Ttwari
    11 अक्टूबर 2018
    इन पंक्तियों को पढ़ कर दिल दिमाग में कृष्ण की छवि रेखांकित होती है, बहुत खूब
  • author
    Vinay Singh
    27 सितम्बर 2018
    बहुत खूब
  • author
    Santosh Sharma
    26 सितम्बर 2018
    बहुत खूब