pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

स्मृति शेष है -1 (गद्य काव्य)

5
8

__________________________________________ जीवन बिखर गया, न वह सँध्याऐं रहीं न सँध्याओं में मित्रों के संग गुनगुनाये गीतों की पन्क्तियों का स्मरण रहा, न प्रियजनों का सानिध्य रहा, न शीतल पवन में झूमते ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    05 മാര്‍ച്ച് 2022
    उच्च स्तरीय सृजन। कवि ने अपनी भाव यात्रा में मानव के अंतर्मन का कोना झांका है। इतिहास बनना इतिहास बनाना दोनों ही एक नए युग को सृजित करने की तरह हैं।🙏
  • author
    04 മാര്‍ച്ച് 2022
    बहुत मार्मिक शब्दचित्र है यह!! इतिहास और स्मृतियों की सटीक विवेचना. प्रभावी लेखन हेतु बहुत बधाई एवं साधुवाद आपको 💐
  • author
    Madhavi Sharma "Aparajita"
    04 മാര്‍ച്ച് 2022
    बेहद भावपूर्ण लेखन,,,,
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    05 മാര്‍ച്ച് 2022
    उच्च स्तरीय सृजन। कवि ने अपनी भाव यात्रा में मानव के अंतर्मन का कोना झांका है। इतिहास बनना इतिहास बनाना दोनों ही एक नए युग को सृजित करने की तरह हैं।🙏
  • author
    04 മാര്‍ച്ച് 2022
    बहुत मार्मिक शब्दचित्र है यह!! इतिहास और स्मृतियों की सटीक विवेचना. प्रभावी लेखन हेतु बहुत बधाई एवं साधुवाद आपको 💐
  • author
    Madhavi Sharma "Aparajita"
    04 മാര്‍ച്ച് 2022
    बेहद भावपूर्ण लेखन,,,,