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स्मार्ट फोन

4.3
11151

“मतलब तुम दोनों नही सुधरोगे ! लिसन गाइज ! यह स्मार्ट फोन एक दिन तुम्हें उल्लू बनाकर छोड़ेगा ।“ -रिया ने अपने स्मार्ट फोन को जींस की पॉकेट में खोंसते हुए कहा । “यार ! तू बात बात पर सैंटी मत हुआ कर ।“...

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लेखक के बारे में
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Narayan Gaurav
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    06 फ़रवरी 2019
    "स्मार्ट फोन" 1 कहानी सामयिक घटनाओं पर आधारित है 2 स्वार्थ के कारण हमारे वैश्वबंधुत्व से आबद्ध परिवेश को नष्ट करने को साजिश का पर्दाफाश हुआ है 3 प्रेम के दुश्मनो पर प्रकाश पड़ा है 4 निजता में सार्वजनिनता को नष्ट करने के दोष छिपा है 5 कहानी पढकर "यह देश" कैसा हो गया मेरा यह देश जहाँ प्रेम करना मुनासिब नहीं लड़की लड़के का मिलना गुनाह है दुष्यंत शाकुंतला का यह देश उन ठेकेदारों का रह गया है जो- धर्म के जाति के लिंग के नाम पर हो गया है दुश्मन प्रेम का ... कहानी में महत्वपूर्ण संदेश है
  • author
    तरु
    05 सितम्बर 2020
    So true!!! मैं खुद ये स्टुपिड messages न फॉरवर्ड करती हूँ न किसी और को करने देती हूँ। बहुत ही कड़वा सच है सच मे, राजनीति कितनी सरलता से समाज को बेवकूफ बना देती है और लोग भी अपना विवेक यूज़ नहीं करते। Hope पाठक take home मैसेज को समझें और अपने जीवन मे अपनाएं भी। अच्छी रचना!!!
  • author
    Dinesh Soni
    30 अक्टूबर 2016
    बहुत बढ़िया कहानी है । सच में नफरत के सिवा ऐसी पोस्ट कुछ भी नहीं पैदा करती है । हमें ऐसी पोस्ट को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए । ये कहानी हमें समाज में फैली व्हाट्सएप्प और फेसबुक से फैलते नफरत के कीड़े को ख़त्म करने की सलाह देती है ।हमें इनका प्रयोग करते हुए भाईचारा बढ़ने के लिए करना चाहिए।
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    06 फ़रवरी 2019
    "स्मार्ट फोन" 1 कहानी सामयिक घटनाओं पर आधारित है 2 स्वार्थ के कारण हमारे वैश्वबंधुत्व से आबद्ध परिवेश को नष्ट करने को साजिश का पर्दाफाश हुआ है 3 प्रेम के दुश्मनो पर प्रकाश पड़ा है 4 निजता में सार्वजनिनता को नष्ट करने के दोष छिपा है 5 कहानी पढकर "यह देश" कैसा हो गया मेरा यह देश जहाँ प्रेम करना मुनासिब नहीं लड़की लड़के का मिलना गुनाह है दुष्यंत शाकुंतला का यह देश उन ठेकेदारों का रह गया है जो- धर्म के जाति के लिंग के नाम पर हो गया है दुश्मन प्रेम का ... कहानी में महत्वपूर्ण संदेश है
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    तरु
    05 सितम्बर 2020
    So true!!! मैं खुद ये स्टुपिड messages न फॉरवर्ड करती हूँ न किसी और को करने देती हूँ। बहुत ही कड़वा सच है सच मे, राजनीति कितनी सरलता से समाज को बेवकूफ बना देती है और लोग भी अपना विवेक यूज़ नहीं करते। Hope पाठक take home मैसेज को समझें और अपने जीवन मे अपनाएं भी। अच्छी रचना!!!
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    Dinesh Soni
    30 अक्टूबर 2016
    बहुत बढ़िया कहानी है । सच में नफरत के सिवा ऐसी पोस्ट कुछ भी नहीं पैदा करती है । हमें ऐसी पोस्ट को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए । ये कहानी हमें समाज में फैली व्हाट्सएप्प और फेसबुक से फैलते नफरत के कीड़े को ख़त्म करने की सलाह देती है ।हमें इनका प्रयोग करते हुए भाईचारा बढ़ने के लिए करना चाहिए।