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श्रवण कला

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हम किसी भी उपदेश पर अमल तभी करते हैं, जब हम उसे ध्यान से पढ़ते हैं या सुनते हैं। थोड़ा सा ज्ञान पाकर उसे बांटना बुद्धिमानी नहीं, किसी भी ज्ञान के बारे में पहले स्वयं सुनिश्चित होना पड़ता ...

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लेखक के बारे में

जीवन जीने का नाम है। सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीयो। खुद खुश रहो और दूसरों को भी रहने दो।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    परमानन्द "प्रेम"
    17 फ़रवरी 2022
    बहुत सुन्दर विचार... सही बात है ध्यानपूर्वक सुनी गई बात ही समझ आती है तत्पश्चात ही स्वयं बोलकर अभिव्यक्ति सही हो सकती है। प्रेरक..👌👌
  • author
    Ashok Kumar Pal
    18 फ़रवरी 2022
    भगवान गणपति भी यही शिक्षा देते हैं कि बड़े बड़े कान इस बात का परिचायक है कि अत्यधिक सुनो कम बोलो। बहुत सुंदर लिखा है आपने 👌👌👌👌✍️
  • author
    17 फ़रवरी 2022
    बिलकुल सही कहा आपने और मैं भी बहुत कम बोलती हूं 🙂🙏
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    परमानन्द "प्रेम"
    17 फ़रवरी 2022
    बहुत सुन्दर विचार... सही बात है ध्यानपूर्वक सुनी गई बात ही समझ आती है तत्पश्चात ही स्वयं बोलकर अभिव्यक्ति सही हो सकती है। प्रेरक..👌👌
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    Ashok Kumar Pal
    18 फ़रवरी 2022
    भगवान गणपति भी यही शिक्षा देते हैं कि बड़े बड़े कान इस बात का परिचायक है कि अत्यधिक सुनो कम बोलो। बहुत सुंदर लिखा है आपने 👌👌👌👌✍️
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    17 फ़रवरी 2022
    बिलकुल सही कहा आपने और मैं भी बहुत कम बोलती हूं 🙂🙏