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श्राद्ध

4.6
19795

महानगरों में रहने वालों की त्रासदी – कंक्रीट के जंगल में ,छोटे – छोटे फ्लैट्स में गुजर बसर करना .यह कहानी ऐसी ही एक महानगरीय सभ्यता को व्याख्यायित करती है .रोजमर्रा की भाग – दौड़ के बीच अपने और अपनों ...

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लेखक के बारे में

शिक्षा – एम्.ए. ( हिन्दी ) सम्प्रति – कंटेंट एडिटर, प्रतिलिपि कॉमिक्स प्रकाशित पुस्तकें – तिराहा,बेगम हज़रत महल (उपन्यास ) अनतर्मन के द्वीप, पॉर्न स्टार और अन्य कहानियां – कहानी संग्रह कई कवितायें ,कहानियाँ एवं लेख पत्र - पत्रिकाओं और कई ब्लॉग्स पर प्रकाशित।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    16 अप्रैल 2019
    वीणा जी श्राद्ध पक्ष का बहुत खूबसूरत ढंग से वर्णन किया है सच मे गरीबी कागस से बड़ी है बाल मन विचार दरिद्रता को खूब अच्छी तरह बुना।है आपको ह्रदय से मुबारक बाद
  • author
    Anju Chouhan
    14 जून 2018
    एक रीतिरिवाज का इतना सटीक तरीके से खंडन , अच्छा लगा। कबीर वादी हो ???
  • author
    Pratima Tripathy
    15 अप्रैल 2019
    बहुत ही मार्मिक एवं हृदय को झकझोर देने वाली कहानी
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    16 अप्रैल 2019
    वीणा जी श्राद्ध पक्ष का बहुत खूबसूरत ढंग से वर्णन किया है सच मे गरीबी कागस से बड़ी है बाल मन विचार दरिद्रता को खूब अच्छी तरह बुना।है आपको ह्रदय से मुबारक बाद
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    Anju Chouhan
    14 जून 2018
    एक रीतिरिवाज का इतना सटीक तरीके से खंडन , अच्छा लगा। कबीर वादी हो ???
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    Pratima Tripathy
    15 अप्रैल 2019
    बहुत ही मार्मिक एवं हृदय को झकझोर देने वाली कहानी