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शोध – अनुसंधान

4.4
360

बहुत लिख ली, परिभाषाएं बहुत कर लिया शोध, बहुत बना दी मर्यादाएं, हमने हंस कर सब ले लिया सर माथे पर, हरिराम ने हीरा के लिए, हसन ने हसीना के लिए, हैरी ने हेलेन के लिए, कितने नियमों की नियमावली लिख दी,...

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समीक्षा
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    Viren Doshi
    13 अक्टूबर 2015
    कालक्रम में समाजरचना पुरुष-प्रधान बन गई...इसे ठीक करने हेतु अपने समाज की महिलाओं को इसी तरह पहल करनी होगी...आह्वान करना होगा...और यह करते करते अपने आप को सामर्थ्यवान करते हुए यह देखना होगा कि प्रतिद्वंदिता नहीं किन्तु प्रतिबद्धता बढ़ें...बहुत बहुत धन्यवाद...और शुभकामनायें...
  • author
    navin kumar sharma
    15 अक्टूबर 2015
    <p><img alt="smiley" height="23" src="http://c.lib.cdssolutions.in/ckeditor-4.4.5-full/plugins/smiley/images/regular_smile.png" title="smiley" width="23" /></p>
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    15 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा का  पूर्ण रूप से अनुसरण  न करती एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता। ।
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    Viren Doshi
    13 अक्टूबर 2015
    कालक्रम में समाजरचना पुरुष-प्रधान बन गई...इसे ठीक करने हेतु अपने समाज की महिलाओं को इसी तरह पहल करनी होगी...आह्वान करना होगा...और यह करते करते अपने आप को सामर्थ्यवान करते हुए यह देखना होगा कि प्रतिद्वंदिता नहीं किन्तु प्रतिबद्धता बढ़ें...बहुत बहुत धन्यवाद...और शुभकामनायें...
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    navin kumar sharma
    15 अक्टूबर 2015
    <p><img alt="smiley" height="23" src="http://c.lib.cdssolutions.in/ckeditor-4.4.5-full/plugins/smiley/images/regular_smile.png" title="smiley" width="23" /></p>
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    15 अक्टूबर 2015
    राष्ट्र भाषा का  पूर्ण रूप से अनुसरण  न करती एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता। ।