बहुत लिख ली, परिभाषाएं बहुत कर लिया शोध, बहुत बना दी मर्यादाएं, हमने हंस कर सब ले लिया सर माथे पर, हरिराम ने हीरा के लिए, हसन ने हसीना के लिए, हैरी ने हेलेन के लिए, कितने नियमों की नियमावली लिख दी,...
कालक्रम में समाजरचना पुरुष-प्रधान बन गई...इसे ठीक करने हेतु अपने समाज की महिलाओं को इसी तरह पहल करनी होगी...आह्वान करना होगा...और यह करते करते अपने आप को सामर्थ्यवान करते हुए यह देखना होगा कि प्रतिद्वंदिता नहीं किन्तु प्रतिबद्धता बढ़ें...बहुत बहुत धन्यवाद...और शुभकामनायें...
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कालक्रम में समाजरचना पुरुष-प्रधान बन गई...इसे ठीक करने हेतु अपने समाज की महिलाओं को इसी तरह पहल करनी होगी...आह्वान करना होगा...और यह करते करते अपने आप को सामर्थ्यवान करते हुए यह देखना होगा कि प्रतिद्वंदिता नहीं किन्तु प्रतिबद्धता बढ़ें...बहुत बहुत धन्यवाद...और शुभकामनायें...
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