एक बार दे दो दीदार कन्हैया, दर्शन के प्यासे रहते हैं। यह नयन तुम्हारी राह तकते, दुख को सहन कर बहते हैं।। यह नश्वर तन भी तुमने दिया , फिर क्यों इस से पाप करवाते हो। इन पापों का बोझ उठवा कर, क्यों इस ...
हरि भक्तो मे छोटी सी दास,
लिखने का करती हूँ प्रयास।
हरि भक्ति को लिखना चाहूँ,
पग -पग आगे बढ़ती जाऊँ।।
मुझे अपनी बहन से कविताएँ व कहानियाँ लिखने की प्रेरणा मिली। मुझे उम्मीद है कि आपको मेरा लेखन पसंद आएगा।
सारांश
हरि भक्तो मे छोटी सी दास,
लिखने का करती हूँ प्रयास।
हरि भक्ति को लिखना चाहूँ,
पग -पग आगे बढ़ती जाऊँ।।
मुझे अपनी बहन से कविताएँ व कहानियाँ लिखने की प्रेरणा मिली। मुझे उम्मीद है कि आपको मेरा लेखन पसंद आएगा।
बिल्कुल सही कहा आपने,, प्रभु का सिमरन हम करते हुए जीवन में सत्कर्म करते रहे,,! और हम प्रभु को कभी नहीं भूले,,, बहुत ही सारगर्भित और सार्थक अभिव्यक्ति 👌👌👌 सुन्दर प्रस्तुति 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏
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बिल्कुल सही कहा आपने,, प्रभु का सिमरन हम करते हुए जीवन में सत्कर्म करते रहे,,! और हम प्रभु को कभी नहीं भूले,,, बहुत ही सारगर्भित और सार्थक अभिव्यक्ति 👌👌👌 सुन्दर प्रस्तुति 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏
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