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शायरी

3.7
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लेखक के बारे में
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deepak kushwaha

"बारिश मे भीँगना, वादियो मे घूमना! किताबो से पढना, डायरी मे लिखना! चाँद को तकना, तारो को गिनना! हवाँओ का चलना, शाम का ढलना! प्रकृति से सीखना, प्रकृति को मानना!" अच्छा लगता है!

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    yogesh kushwah
    22 ଜୁନ 2022
    ghhhh
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    दिलीप सैनी "Saini"
    23 ଅକ୍ଟୋବର 2017
    good
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    yogesh kushwah
    22 ଜୁନ 2022
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    दिलीप सैनी "Saini"
    23 ଅକ୍ଟୋବର 2017
    good