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शर्मिंदगी

4.5
2826

आज हम सबने फादर्स डे तो मना लिया.....सबने अपने व्हाट्सएप और फेसबुक पर अपने पिता जी की फ़ोटो के साथ उन्हें याद किया....मैंने भी किया..चुकी दुनिया रोज एक नए तरीके से बदलती जा रही है....पता नहीं ये ...

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लेखक के बारे में

मुझे पढ़ना क्योंकि मैं तुम्हे लिखता हूँ!!

समीक्षा
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  • author
    Sapna R Dash
    30 জুলাই 2018
    चाहे कितनी भी ऊंचाई पर उड़ लो नीचे जमीन को कभी नहीं भूलनी चाहिए
  • author
    Kamlesh Patni
    19 মে 2022
    आज पद ,प्रतिष्ठा, मान,सम्मान के आगे मानवीय संबंध धूलधूस रित हो रहे हैं।पैसा पैसा यही लक्ष्य हो गया है जीवन का।बढते वृद्धाश्रम इसका साक्षात उदाहरण। नित्य त्वमेव माता चपिता त्वमेव की संस्कृति में मदर्स,फादर्स डे कुछ अटपटा लगता है।
  • author
    madhu singh
    31 জুলাই 2018
    मां का आंचल, पिता की उंगली जब छोड़ हम बडे़ होने का दिखावा करते हैं सचमुच उसी दिन बहुमूल्य रिश्ते से वंचित हो जाते हैं।
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    Sapna R Dash
    30 জুলাই 2018
    चाहे कितनी भी ऊंचाई पर उड़ लो नीचे जमीन को कभी नहीं भूलनी चाहिए
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    Kamlesh Patni
    19 মে 2022
    आज पद ,प्रतिष्ठा, मान,सम्मान के आगे मानवीय संबंध धूलधूस रित हो रहे हैं।पैसा पैसा यही लक्ष्य हो गया है जीवन का।बढते वृद्धाश्रम इसका साक्षात उदाहरण। नित्य त्वमेव माता चपिता त्वमेव की संस्कृति में मदर्स,फादर्स डे कुछ अटपटा लगता है।
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    madhu singh
    31 জুলাই 2018
    मां का आंचल, पिता की उंगली जब छोड़ हम बडे़ होने का दिखावा करते हैं सचमुच उसी दिन बहुमूल्य रिश्ते से वंचित हो जाते हैं।