pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

शक्ति

4.4
20131

सारिका का घर से जाने का दिल नहीं कर रह था जाने क्यों वो बारबार अपनी माँ से कह रही थी"माँ आज कुछ अच्छा नहीं लग रहा"माँ न कहा"तो आज मत जा कॉलेज" दिल तो नहीं पर जाना ही होगा माँ सारिका ने माँ से कहा ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
ऋचा तिवारी

परिचय: Education :BCA and MBA ,achieved best teacher award from "human resource development government of India",achieved various certificates for my hard work.लेखक की कलम ही उसका हथियार है,इसी हथियार को ले कर समाज में हो रही बुराइयों के विपक्ष खड़ी हूँ,मेरी हर एक रचना किसी सत्य घटना से ही प्रेरित रहती है कोशिश करती हूँ समाज की कुछ बुराईयां और कुछ अच्छाईयां आप के सामने प्रस्तुत करूँ,अगर मेरी सोच आप को अच्छी लगती हो या उसमे कुछ कमी दिखे तो निसंकोच आप अपने विचार मुझ तक पहुँचाये.आप richatiwari721@gmail.com पर ईमेल भी कर सकते है या मुझे फेसबुक पर massage भी कर सकते है.मैं एक समाजसेवक हूँ और सब की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहती हूँ । more about me @https://richatiwarinarayani.blogspot.in/

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    26 मई 2018
    कहानी में नारी शक्ति की भावना को दर्शाया गया हैं दर असल हमारे समाज मे पुरुष की मानसिकता नारी के प्रति बदलनी चाहिए क्योकि सोच बदले तो समाज भी बदल जाएगा।
  • author
    Yogendra Singh
    22 जनवरी 2019
    कथा तो अच्छी है, कथा की नायिका ने जो किया वह यथार्थ में नामुमकिन तो नहीं परन्तु 'नामुमकिन' से कम भी नहीं। अच्छे लेखन के लिए बधाई।
  • author
    26 मई 2018
    संदेशात्मक कहानी , मगर जिस भीड़ ने सारिका की बहादुरी पर तालियां बजाई ,वही भीड़ उसको बचाने अगर पहले आ जाए , तो हादसे होने के पहले ही रुक जाएं ......? कहते हैं कि कहानियां सच तो नहीं होती .. मगर सच पर आधारित ज़रूर होतीं है ......?
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    26 मई 2018
    कहानी में नारी शक्ति की भावना को दर्शाया गया हैं दर असल हमारे समाज मे पुरुष की मानसिकता नारी के प्रति बदलनी चाहिए क्योकि सोच बदले तो समाज भी बदल जाएगा।
  • author
    Yogendra Singh
    22 जनवरी 2019
    कथा तो अच्छी है, कथा की नायिका ने जो किया वह यथार्थ में नामुमकिन तो नहीं परन्तु 'नामुमकिन' से कम भी नहीं। अच्छे लेखन के लिए बधाई।
  • author
    26 मई 2018
    संदेशात्मक कहानी , मगर जिस भीड़ ने सारिका की बहादुरी पर तालियां बजाई ,वही भीड़ उसको बचाने अगर पहले आ जाए , तो हादसे होने के पहले ही रुक जाएं ......? कहते हैं कि कहानियां सच तो नहीं होती .. मगर सच पर आधारित ज़रूर होतीं है ......?