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शादी की पहली रात

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सगाई के बाद हर दिन एक दूसरे से बेइंतहा बातें की। न जाने कैसे-कैसे ख़्वाब देखें व बातें की। उनमें सबसे ज्यादा बातें हुई तो शादी की पहली रात की। जो दुनिया की हर लड़की और लड़का करतें है। वह अपने मां बाप की ...

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लेखक के बारे में
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ईकराम पटेल

जीवन के एक असंतुलित पड़ाव पर आते ही दुनिया आपको भूल जाती है, रिश्ते नाम के रह जाते हैं और जिंदगी एक औपचारिकता मात्र रह जाती है। जैसे-जैसे वक्त बढ़ रहा है, लोगों से चिढ़ होने लगी है। जिम्मेदारियों का एहसास हो रहा है। अपने लोग अब अपने नहीं रहे। स्वार्थ ही सत्य है।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Khushbu Tyagi
    17 दिसम्बर 2020
    समझ नहीं आ रहा क्या समीक्षा करूं, आपने जो भावनाएं दर्शायी है उनकी तारीफ के लिए मेरे पास शब्द नहीं है, बहुत ही प्यारा संस्मरण है 👌👌👌👌👌
  • author
    .
    17 दिसम्बर 2020
    😊nice...
  • author
    बलजीत कौर
    17 दिसम्बर 2020
    बहुत बहुत ही सुंदर लिखा है आपने.. .सच ही लिखा है बहुत ही कम लोग होते हैं जिन्हें नई दुल्हन की थकावट और अपने मायके को छोड़ने के दर्द का अहसास होता है... अगर यही समझ जाएं ना तो रिश्ता सारी उम्र के लिए मजबूत हो जाता है.... बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने.... हर बार की तरह बेहतरीन...
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    Khushbu Tyagi
    17 दिसम्बर 2020
    समझ नहीं आ रहा क्या समीक्षा करूं, आपने जो भावनाएं दर्शायी है उनकी तारीफ के लिए मेरे पास शब्द नहीं है, बहुत ही प्यारा संस्मरण है 👌👌👌👌👌
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    .
    17 दिसम्बर 2020
    😊nice...
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    बलजीत कौर
    17 दिसम्बर 2020
    बहुत बहुत ही सुंदर लिखा है आपने.. .सच ही लिखा है बहुत ही कम लोग होते हैं जिन्हें नई दुल्हन की थकावट और अपने मायके को छोड़ने के दर्द का अहसास होता है... अगर यही समझ जाएं ना तो रिश्ता सारी उम्र के लिए मजबूत हो जाता है.... बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने.... हर बार की तरह बेहतरीन...