सगाई के बाद हर दिन एक दूसरे से बेइंतहा बातें की। न जाने कैसे-कैसे ख़्वाब देखें व बातें की। उनमें सबसे ज्यादा बातें हुई तो शादी की पहली रात की। जो दुनिया की हर लड़की और लड़का करतें है। वह अपने मां बाप की ...
जीवन के एक असंतुलित पड़ाव पर आते ही दुनिया आपको भूल जाती है, रिश्ते नाम के रह जाते हैं और जिंदगी एक औपचारिकता मात्र रह जाती है। जैसे-जैसे वक्त बढ़ रहा है, लोगों से चिढ़ होने लगी है। जिम्मेदारियों का एहसास हो रहा है। अपने लोग अब अपने नहीं रहे। स्वार्थ ही सत्य है।
सारांश
जीवन के एक असंतुलित पड़ाव पर आते ही दुनिया आपको भूल जाती है, रिश्ते नाम के रह जाते हैं और जिंदगी एक औपचारिकता मात्र रह जाती है। जैसे-जैसे वक्त बढ़ रहा है, लोगों से चिढ़ होने लगी है। जिम्मेदारियों का एहसास हो रहा है। अपने लोग अब अपने नहीं रहे। स्वार्थ ही सत्य है।
बहुत बहुत ही सुंदर लिखा है आपने.. .सच ही लिखा है बहुत ही कम लोग होते हैं जिन्हें नई दुल्हन की थकावट और अपने मायके को छोड़ने के दर्द का अहसास होता है... अगर यही समझ जाएं ना तो रिश्ता सारी उम्र के लिए मजबूत हो जाता है.... बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने.... हर बार की तरह बेहतरीन...
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बहुत बहुत ही सुंदर लिखा है आपने.. .सच ही लिखा है बहुत ही कम लोग होते हैं जिन्हें नई दुल्हन की थकावट और अपने मायके को छोड़ने के दर्द का अहसास होता है... अगर यही समझ जाएं ना तो रिश्ता सारी उम्र के लिए मजबूत हो जाता है.... बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने.... हर बार की तरह बेहतरीन...
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