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शब्द

4.3
2547

शब्द मेरे अंदर ही घुट रहे थे मनो बहार आने को तरस रहे थे, मैं उनको निकलने से रोक रही थी, यह दुनिया मेरा दर्द ना पढ़ ले ऐसा सोच रही थी । अपनी हँसी का मुखौटा कभी ना उतारती, अगर यह घटना अभी ना घट जाती, ...

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लेखक के बारे में
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मनीषा श्री

मे एक भू -विज्ञानिक हू। मने अपनी शिक्षा IIT रूर्की से २००५ मे पूरी करी और तब से तेल एवं गैस अन्वेषण विभाग में भूविज्ञानी के रूप में काम कर रही हू। मेरे लिए कविता लिखना सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि यह मेरे जीवन में खुशी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। मैं अपने जीवन के अनुभव के अनुसार लिखती हू और उसमें अपनी भावनाऐ डालने का प्रयास करती हूँ । मेरी कविता हो सकता है सबसे अच्छा कृतियों मे ना हो , लेकिन अभी भी यह एक ईमानदार कोशिश है ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Omparkash 'Hathpasaria'
    12 अक्टूबर 2015
    कवि ने शब्दों की गरिमा में अपने आप की पीड़ा को व्यक्त तो किया लेकिन इन्ही शब्दों के पीड़ा बन जाने और फिर प्रकट होने की यात्रा का विवरण भी झरते हुए आसुंओं के माध्यम से देते हुए जब अंत में पाठको से निवेदन किया है कि इस कविता को कोई मनोरंजन मत समझना तो भी कवि शब्दों की गरिमा को बनाये रखने की कामना कर रही है , जो एक सृजनशील व्यक्तित्व का वास्तविक गुण-धर्म होता है , जिसे वह अंत तक निभा रही है . कवि और कविता का मर्म शब्दों की गरिमा की रक्षा को तत्पर और आतुर इतना कहीं और नहीं दिखाई देता है .       
  • author
    ajay shakyawal
    09 मार्च 2019
    I can feel the emotion of your words, and nice your Creativity
  • author
    Ruchika Sharma
    13 अक्टूबर 2015
    Well done Manisha you can express beautifully......I loved it
  • author
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  • author
    Omparkash 'Hathpasaria'
    12 अक्टूबर 2015
    कवि ने शब्दों की गरिमा में अपने आप की पीड़ा को व्यक्त तो किया लेकिन इन्ही शब्दों के पीड़ा बन जाने और फिर प्रकट होने की यात्रा का विवरण भी झरते हुए आसुंओं के माध्यम से देते हुए जब अंत में पाठको से निवेदन किया है कि इस कविता को कोई मनोरंजन मत समझना तो भी कवि शब्दों की गरिमा को बनाये रखने की कामना कर रही है , जो एक सृजनशील व्यक्तित्व का वास्तविक गुण-धर्म होता है , जिसे वह अंत तक निभा रही है . कवि और कविता का मर्म शब्दों की गरिमा की रक्षा को तत्पर और आतुर इतना कहीं और नहीं दिखाई देता है .       
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    ajay shakyawal
    09 मार्च 2019
    I can feel the emotion of your words, and nice your Creativity
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    Ruchika Sharma
    13 अक्टूबर 2015
    Well done Manisha you can express beautifully......I loved it