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सेल्फी जेनेरेशन

4.4
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सावन का महीना था। केसरिया रंग के झण्डे, केसरिया परिधान, कंधे पर काँवर लिए शिव भक्तों का हुजूम चला जा रहा था। ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के नारों से आकाश गूँज रहा था। काँवर ढोने वाले शिवभक्त हर ...

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लेखक के बारे में

पढ़ना मेरी आदत में शामिल है, जबकि लिखना महज शौक है। शिक्षा :- एम.ए. (हिन्दी साहित्य, राजनीति विज्ञान, शिक्षाशास्त्र), बी.एड., एम.लिब.आई.एस-सी., (सभी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण) पीएच.डी., C.G. T.E.T., U.G.C. N.E.T. प्रसारण/प्रकाशन :- 1. आकाशवाणी केन्द्र, रायगढ़ (छ.ग.) में युववाणी तथा किसानवाणी कम्पीयर के रूप में चार सौ से अधिक नियमित कार्यक्रम, धारावाहिक, दर्जनों भेंटवार्ता तथा जीवंत फोन-इन-कार्यक्रम का संचालन/प्रसारण। 2. मासिक कल्याण, गीता प्रेस गोरखपुर; मासिक साहित्य अमृत, नईदिल्ली; मासिक शुभ तारिका, अबाला छावनी हरियाणा; मासिक गुड़िया, नई दिल्ली; त्रैमासिक अविराम साहित्यिकी, मासिक शब्दकार, मासिक चकमक, भोपाल; मासिक नूतन कहानियाँ, प्रयागराज; मासिक समझ झरोखा, भोपाल; अर्धवार्षिक लघुकथा कलश, त्रैमासिक साहित्य कलश, त्रैमासिक दृष्टि, त्रैमासिक चिकिर्षा, खजूरी बाजार, इंदौर; मासिक प्राची, नई दिल्ली; मासिक प्रेरणा अंशु, मासिक ककसाड़, नई दिल्ली; मासिक वीणा, इंदौर; मासिक सरस्वती सुमन, मासिक दि अंडरलाइन, कानपुर; मासिक हिमप्रस्थ, शिमला; मासिक भटनेर पोस्ट, हनुमानगढ़, राजस्थान; त्रैमासिक सुसंभाव्य, त्रैमासिक संवदिया, मासिक अट्टहास, मासिक अरण्यवाणी, मासिक सुवासित, मासिक शब्द्कार, मासिक अदम्य, मासिक जय विजय, मासिक सुरभि सलोनी, त्रैमासिक अनुगुंजन, मासिक शाश्वत सृजन, त्रैमासिक समहुत, मासिक स्वर्णवाणी, मासिक रचना उत्सव, प्रयागराज; 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समीक्षा
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  • author
    Mukesh Kumar Yadav
    14 फ़रवरी 2019
    नई पीढ़ी के लोगों ने भाव भजन, व्यवहार से दूरी बना लिया है
  • author
    Asha Roy "आशा"
    01 अगस्त 2022
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, बहुत थोड़े शब्दों के माध्यम से अपने बहुत बड़ी बात ध्यान कर दी।आज कल कांवर ले कर जाना स्टेटस शो करना है।लोग धार्मिक भावनाओं से नहीं जाते दिखावा मूल उद्देश्य होता है कि मैं धार्मिक हूं पर सारे व्यवहारिक ज्ञान को घर पर ही छोड़ आते हैं। कभी मां बाप को एक लोटा जल ला कर नहीं दिया होगा और यहां दिखावे के लिए बोला बाबा को जल ढोकर सौ किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तय कर धक्के खाते हुए औरों को धकेलते हुए पत्थर पर जल डालने की होड़ मचा देने हैं, चाहते लपेटे में बूढ़ा हो या बच्चे उन्हें तो किसी तरह बोलैं बाबा के सर पर जल डालना है,चाहे लोटा उनके सर पर ही न गिर जाए। असहाय भोला बाबा तो भक्तों की परीक्षा रास्ते में ही ले लिए आप की कहानी में। असहाय की सहायता ही जीवन का सही पूजा है यानि कर्म ही पूजा है।और ये सब मां बाप वह परिवार के लिए सही संस्कार से मिलते हैं।
  • author
    Anupma "Prayagi"
    11 नवम्बर 2019
    ye samaj ki samasya ho gai hai. log video banate hai selfie lete hai aur aage badh jate hai. madad koi yada kada he krta hai.
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    Mukesh Kumar Yadav
    14 फ़रवरी 2019
    नई पीढ़ी के लोगों ने भाव भजन, व्यवहार से दूरी बना लिया है
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    Asha Roy "आशा"
    01 अगस्त 2022
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, बहुत थोड़े शब्दों के माध्यम से अपने बहुत बड़ी बात ध्यान कर दी।आज कल कांवर ले कर जाना स्टेटस शो करना है।लोग धार्मिक भावनाओं से नहीं जाते दिखावा मूल उद्देश्य होता है कि मैं धार्मिक हूं पर सारे व्यवहारिक ज्ञान को घर पर ही छोड़ आते हैं। कभी मां बाप को एक लोटा जल ला कर नहीं दिया होगा और यहां दिखावे के लिए बोला बाबा को जल ढोकर सौ किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तय कर धक्के खाते हुए औरों को धकेलते हुए पत्थर पर जल डालने की होड़ मचा देने हैं, चाहते लपेटे में बूढ़ा हो या बच्चे उन्हें तो किसी तरह बोलैं बाबा के सर पर जल डालना है,चाहे लोटा उनके सर पर ही न गिर जाए। असहाय भोला बाबा तो भक्तों की परीक्षा रास्ते में ही ले लिए आप की कहानी में। असहाय की सहायता ही जीवन का सही पूजा है यानि कर्म ही पूजा है।और ये सब मां बाप वह परिवार के लिए सही संस्कार से मिलते हैं।
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    Anupma "Prayagi"
    11 नवम्बर 2019
    ye samaj ki samasya ho gai hai. log video banate hai selfie lete hai aur aage badh jate hai. madad koi yada kada he krta hai.