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कामवाली आज नहीं आई, ऊपर के काम करेगा कौन? साबुन  इतना कैसे गला , महिने भर भी क्यों नहीं चला ? दूध का बरतन फिर जल गया, वह उफन कर कैसे गिर गया? कहाँ खरच हो गए इतने पैसे कमरे का पंखा फिर भी नहीं चला ...

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लेखक के बारे में
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कमल कांत

सस्पेंस , थ्रिलर , रोमांटिक, हास्य व्यंग्य की रचनाओं के अलावा गंभीर साहित्यिक और ज्ञानवर्धक छोटे लेख भी।पढ़ के तो देखिए 🙏 शौक:- पढ़ना,लिखना,घूमना और फोटोग्राफी जन्म :लखनऊ (उ०प्र०);27/08/1951 स्थायी और वर्तमान निवास :बंगलौर(कर्नाटक) [email protected]

समीक्षा
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    शोभा शर्मा
    10 जनवरी 2021
    भाग्यवान नहीं सर जी, भाग्यविधाता , पति परमेस्सर 😀इतनी कड़ी दृष्टि वही रखकर अपनी घरवाली को नाचनी का नाच नचाता है 😆 पर मजा तब है कि घरवाली पर फिर भी असर ना पड़े । जो पड़ गया तो आँसू बहाने से घर का माहौल बिगड़ गया।
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    Rohit kumar Singh
    10 जनवरी 2021
    सांस तो लेने दिया भाई,या वो भी नहीं,वैसे बीवियों का अच्छा वर्णण किया आपने।
  • author
    SURAJ Chaurasiya
    10 जनवरी 2021
    भई वाह , बहुत सुंदर 🙏🙏💐💐💐
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    शोभा शर्मा
    10 जनवरी 2021
    भाग्यवान नहीं सर जी, भाग्यविधाता , पति परमेस्सर 😀इतनी कड़ी दृष्टि वही रखकर अपनी घरवाली को नाचनी का नाच नचाता है 😆 पर मजा तब है कि घरवाली पर फिर भी असर ना पड़े । जो पड़ गया तो आँसू बहाने से घर का माहौल बिगड़ गया।
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    Rohit kumar Singh
    10 जनवरी 2021
    सांस तो लेने दिया भाई,या वो भी नहीं,वैसे बीवियों का अच्छा वर्णण किया आपने।
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    SURAJ Chaurasiya
    10 जनवरी 2021
    भई वाह , बहुत सुंदर 🙏🙏💐💐💐