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सवैया छंद

4.6
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सवैया छंद ------------- प्रात भई उठ जाग न रे आय गयो दिन तूं अब सोअत है। आलस त्याग  जगो मन जागन से सब कारज होअत है। राम भजो फिर  काम लगो सुख चैन यही नित डोलत है। मानव  जीवन को  छड़ या तुम  सोय न ...

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लेखक के बारे में
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Mahendra Maurya

"संघर्ष कर आगे बढ़ो, सत्य को चूनो, मानवता की पूजा करो,कर्म को प्रधानता दो, खूद पर भरोसा करो और ईश्वर में विश्वास रखो।यही मेरे जीवन का मूल मंत्र है। "

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    AFROZ KHAN
    11 जून 2023
    वाह बहुत ही सटीक सार्थक अभिव्यक्ति और सुंदर पंक्तियां है।
  • author
    अर्चना सिंह
    11 जून 2023
    पंक्तियों का सुंदर वर्णन 🙏🙏💐💐
  • author
    Kiran Pandey
    11 जून 2023
    बहुत सुन्दर......
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    AFROZ KHAN
    11 जून 2023
    वाह बहुत ही सटीक सार्थक अभिव्यक्ति और सुंदर पंक्तियां है।
  • author
    अर्चना सिंह
    11 जून 2023
    पंक्तियों का सुंदर वर्णन 🙏🙏💐💐
  • author
    Kiran Pandey
    11 जून 2023
    बहुत सुन्दर......