पति के साथ चिता में जा जली, वो सती, वो सती ! उम्र भर पति का बोज़ ढोती रही, पल पल जी ती रही, पल पल मरती रही, वो सती नहीं ?! ज़बरन चिता में चढ़ाई गई, वो सती ! सारी ज़िम्मेदारियाँ निभाती रही, चुपचाप ...
मन पर एक मन बोझ पड़ा कविता नहीं एक आग का शोला भड़का आपकी किया ने वह कह दिया जिसको शब्द देने की हिम्मत नहीं हो पाती पुरुष प्रधान सन्सार में वो सता ? सवाल ही नहीं उठता !आप मेरी ओर से सहस्त्र बधाई स्वीकार करें सर्वोत्तम कविता ।
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मन पर एक मन बोझ पड़ा कविता नहीं एक आग का शोला भड़का आपकी किया ने वह कह दिया जिसको शब्द देने की हिम्मत नहीं हो पाती पुरुष प्रधान सन्सार में वो सता ? सवाल ही नहीं उठता !आप मेरी ओर से सहस्त्र बधाई स्वीकार करें सर्वोत्तम कविता ।
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