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सपनों में सेंध

4.3
424

वो देखो लगाया फिर किसी ने तुलसी को दीया कि छितरे किनारों वाले शाम के सिंदूरी रूमाल की तुरपन किसी ने की है अभी वो देखो घोंसलों में लौटे हैं परिन्दे अभी कि दिनभर की थकान टंगी है दरवाजे के पीछे कहीं वो...

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लेखक के बारे में
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अंजनी शर्मा
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    11 अक्टूबर 2015
    "सपनों में सेंघ" अंजनी शर्मा की जादू भरी कविता है। आकर्षक लय और शब्द तथा भावों की खूबसूरत कसीदाकारी की मधुर कविता। "शाम के सिंदूरी रुमाल की तुरपन" और "कहानियों की खटिया पर पसरते बच्चे" जैसे मनमोहक रूपक से सजी अर्थपूर्ण और सीधे दिल में उतरने वाली परिपक्व कविता।
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    25 अक्टूबर 2015
    खिडकी जैसे शब्द हैं । राष्ट्र भाषा का पूर्ण अनुसरण न करती एक नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
  • author
    Satendra Nath Choubey
    01 जून 2021
    बहुत सुन्दर रचना। बिंबों का प्रयोग बेहतरीन है।
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  • author
    11 अक्टूबर 2015
    "सपनों में सेंघ" अंजनी शर्मा की जादू भरी कविता है। आकर्षक लय और शब्द तथा भावों की खूबसूरत कसीदाकारी की मधुर कविता। "शाम के सिंदूरी रुमाल की तुरपन" और "कहानियों की खटिया पर पसरते बच्चे" जैसे मनमोहक रूपक से सजी अर्थपूर्ण और सीधे दिल में उतरने वाली परिपक्व कविता।
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    25 अक्टूबर 2015
    खिडकी जैसे शब्द हैं । राष्ट्र भाषा का पूर्ण अनुसरण न करती एक नितांत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
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    Satendra Nath Choubey
    01 जून 2021
    बहुत सुन्दर रचना। बिंबों का प्रयोग बेहतरीन है।