वो देखो लगाया
फिर किसी ने
तुलसी को दीया
कि
छितरे किनारों वाले
शाम के सिंदूरी
रूमाल की तुरपन
किसी ने की है अभी वो देखो
घोंसलों में
लौटे हैं
परिन्दे अभी
कि
दिनभर की थकान
टंगी है
दरवाजे के पीछे कहीं वो...
"सपनों में सेंघ" अंजनी शर्मा की जादू भरी कविता है। आकर्षक लय और शब्द तथा भावों की खूबसूरत कसीदाकारी की मधुर कविता। "शाम के सिंदूरी रुमाल की तुरपन" और "कहानियों की खटिया पर पसरते बच्चे" जैसे मनमोहक रूपक से सजी अर्थपूर्ण और सीधे दिल में उतरने वाली परिपक्व कविता।
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"सपनों में सेंघ" अंजनी शर्मा की जादू भरी कविता है। आकर्षक लय और शब्द तथा भावों की खूबसूरत कसीदाकारी की मधुर कविता। "शाम के सिंदूरी रुमाल की तुरपन" और "कहानियों की खटिया पर पसरते बच्चे" जैसे मनमोहक रूपक से सजी अर्थपूर्ण और सीधे दिल में उतरने वाली परिपक्व कविता।
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