प्रिय बेटी अद्विका, कल तुमने घर वापस जाने से पहले पूंछा था , “क्यों हम बड़े लोग ज़िन्दगी को रस्मों रिवाज़ मैं कैद करके रखते हैं और छोटी छोटी बातों में उलझ कर रह जाते हैं? हमें वो ताजी हवा क्यों ...

प्रतिलिपिप्रिय बेटी अद्विका, कल तुमने घर वापस जाने से पहले पूंछा था , “क्यों हम बड़े लोग ज़िन्दगी को रस्मों रिवाज़ मैं कैद करके रखते हैं और छोटी छोटी बातों में उलझ कर रह जाते हैं? हमें वो ताजी हवा क्यों ...