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संशय

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4.2

हमेशा मुस्कराने वाला अभय आज एक पेशोपेश में फंसा हुआ था। उसे आभास होने लगा था कि उसके सोचने समझने की शक्ति कहीं गुम होम लगी थी। 2 परिवारों की खुशियां उसके हर एक कदम को प्रभावित कर रहे थे। सोचते ...