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संग तुम्हारे

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4.2

पार करूं चौखट खामोशी की, संग तुम्हारे जीवन में शब्दों से रंग भरुं, बैठ कहीं नदी के तट पर, निस्तब्धता में, चमकीले जीवन के स्वप्न बुनूं, जीवन की इस कठिन डगर पर ,मन करता है ,कर दृढ़ कदमों को अपने ,बनकर...