उलझन और सुलझन जब साथ चलने लगे गमो मे खुशी मे जब बात चलने लगें तब अपने दर्द को दिल मे इस तरह छुपा लो कि दुनिया कदमो के साथ-साथ चलने लगें होश मे हो या हो जोश मे धैर्य कभी न खोना क्या पता कहीं किसी मोड़ ...
जन्म - 30 मई,पिता - श्री दीपक सक्सैनामाता - श्रीमती मनीषा सक्सैनालेखन विधा – कविता, गजल् ,मुक्तक।विभिन्न साईट्स पर प्रकाशित रचनायें - www.hidisahitya.org,www.zouve.com,www.allpoetry.com
सारांश
<p>जन्म - 30 मई,</p><p>पिता - श्री दीपक सक्सैना<br />माता - श्रीमती मनीषा सक्सैना</p><p>लेखन विधा – कविता, गजल् ,मुक्तक।</p><p>विभिन्न साईट्स पर प्रकाशित रचनायें - <u><a href=""http:/www.zouve.com"">www.hidisahitya.org</a></u>,<u><a href=""http:/www.zouve.com"">www.zouve.com</a></u>,<u><a href=""http:/www.allpoetry.com"">www.allpoetry.com</a></u></p>
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या