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संभलते आसूँ विखरते दोस्त

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उलझन और सुलझन जब साथ चलने लगे गमो मे खुशी मे जब बात चलने लगें तब अपने दर्द को दिल मे इस तरह छुपा लो कि दुनिया कदमो के साथ-साथ चलने लगें होश मे हो या हो जोश मे धैर्य कभी न खोना क्या पता कहीं किसी मोड़ ...

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लेखक के बारे में
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Nirdesh Kudeshiya

जन्म - 30 मई,पिता - श्री दीपक सक्सैनामाता - श्रीमती मनीषा सक्सैनालेखन विधा – कविता, गजल् ,मुक्तक।विभिन्न साईट्स पर प्रकाशित रचनायें - www.hidisahitya.org,www.zouve.com,www.allpoetry.com

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    23 सितम्बर 2022
    जीने की राह दिखाती बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति । हार्दिक साधुवाद
  • author
    Vandana Lasiyal
    27 जुलाई 2019
    wow wht a compliment on life
  • author
    ajay Kumar
    17 सितम्बर 2019
    अति सुन्दर
  • author
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    23 सितम्बर 2022
    जीने की राह दिखाती बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति । हार्दिक साधुवाद
  • author
    Vandana Lasiyal
    27 जुलाई 2019
    wow wht a compliment on life
  • author
    ajay Kumar
    17 सितम्बर 2019
    अति सुन्दर