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समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का

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समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का 'अकबर' ये ग़ज़ल मेरी है अफ़साना किसी का गर शैख़-ओ-बहरमन सुनें अफ़साना किसी का माबद न रहे काबा-ओ-बुतख़ाना किसी का अल्लाह ने दी है जो तुम्हे चाँद-सी सूरत रौशन भी करो ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : अकबर हुस्सैन रिज़वी उपनाम : अकबर अलाहाबादी जन्म : 16 नवंबर 1846 देहावसान: 15 फरवरी 1921 भाषा : उर्दू विधाएँ : ग़ज़ल, शायरी अकबर अलाहाबादी उर्दू व्यंग्य के अग्रणी रचनाकारों में से एक हैं, इनके काफी शेरों एवम ग़ज़लों में सामाजिक दर्द को सरल भाषा में हास्यपूर्क ढंग से उकेरा गया है। "हंगामा है क्यूं बरपा" इनकी मशहूर ग़ज़लों में से एक है

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    "Azaad"
    12 दिसम्बर 2018
    ये अकबर हैं नई ग़ज़ल के उस्ताद...हिंदी में लिखने वाले साहब कुछ शब्दों को सुधार लें जैसे ब्रह्मण
  • author
    20 फ़रवरी 2024
    अश्क आंखों में आ जाए नींद की जगह ऐसी अफसाना सुनो।
  • author
    Harvinder Kour Raina
    22 अक्टूबर 2021
    बहुत खूब बेहतरीन 👍👍
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  • कुल टिप्पणी
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    "Azaad"
    12 दिसम्बर 2018
    ये अकबर हैं नई ग़ज़ल के उस्ताद...हिंदी में लिखने वाले साहब कुछ शब्दों को सुधार लें जैसे ब्रह्मण
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    20 फ़रवरी 2024
    अश्क आंखों में आ जाए नींद की जगह ऐसी अफसाना सुनो।
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    Harvinder Kour Raina
    22 अक्टूबर 2021
    बहुत खूब बेहतरीन 👍👍