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सहज पके सो मीठा होय।

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एक बेल मैंने थी बोई, यह सोचकर - बडी एक दिन हो जाएगी। चैन नींद खुशियों की खोई। पानी डाला जड में हर दिन, नही चैन था पल देखे बिन। रोज सवेरे जल्दी उठकर, खिडकी से बाहर झाँककर। बढती घटती लता ताकता, ...

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लेखक के बारे में
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K. R. Garg "Bharat"

I am an English Lecturer working at a private school in my town. I , being, an emotional person, often find emotions overflowing which results in poems. I have interest in creative writing and want to participate in writing contest.

समीक्षा
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    17 जनवरी 2021
    बेहतरीन कविता
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    17 जनवरी 2021
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