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सभ्य संस्कारी विश्वगुरू

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हर वह इंसान स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा है जो कल तक भविष्य के सुनहरे स्वपन सँजो रहा था। आज जीवन की क्षणभंगुरता का एहसास इतना शिद्दत से महसूस कर रहा है। इंसान को इंसान से दूरी बना कर रहना है मास्क ...

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लेखक के बारे में
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Navisha Soni

डूबकर पढ़ना

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Nadeem
    12 जून 2021
    यथार्थ वर्णन किया 💐💐💐
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    12 जून 2021
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