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सभ्य वेश्याएँ हड़ताल पर हैं

4.2
748

(क) अपनी माँगों को लेकर सभ्य वेश्याएं हड़ताल पर हैं वे कहती हैं, ये देह उनकी नहीं सरकार की संपत्ति है जमीन और पानी की तरह एक संसाधन कोयले और अयस्कों की तरह वे तो इस देह की मजदूरनें हैं वे कहती ...

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लेखक के बारे में
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सुशील मानव
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Miss Singh
    26 ஆகஸ்ட் 2019
    last ki panktiyan shandar h👌👌 kash aisa hi jay
  • author
    रुद्र
    07 ஜூன் 2020
    आखिरी वाला तो सर्वोत्तम है
  • author
    राजकमल नव
    16 அக்டோபர் 2017
    प्राचीन काल से आधुनिक काल तक वेश्यांए के ददृ कै प्रति जो आपने सहानुभूति के साथ उनके ददृ को दिखाया है बहुत ही संवेदनशील हैं
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    Miss Singh
    26 ஆகஸ்ட் 2019
    last ki panktiyan shandar h👌👌 kash aisa hi jay
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    रुद्र
    07 ஜூன் 2020
    आखिरी वाला तो सर्वोत्तम है
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    राजकमल नव
    16 அக்டோபர் 2017
    प्राचीन काल से आधुनिक काल तक वेश्यांए के ददृ कै प्रति जो आपने सहानुभूति के साथ उनके ददृ को दिखाया है बहुत ही संवेदनशील हैं