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हिन्दी

सब दिन होत न एक समान

4.8
30

किस्मत के खेल भी बड़े निराले होते हैं । कभी दसों उंगलियां घी में होती हैं और कभी मयस्सर भी नहीं दो निवाले होते हैं । कभी इस देश में एक खानदान की तूती बोलती थी मगर आज वह खानदान "दाना पानी" को मोहताज...

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लेखक के बारे में
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श्री हरि

हरि का अंश, शंकर का सेवक हरिशंकर कहलाता हूँ अग्रसेन का वंशज हूँ और "गोयल" गोत्र लगाता हूँ कहने को अधिकारी हूँ पर कवियों सा मन रखता हूँ हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान से बेहद, प्यार मैं दिल से करता हूँ ।। गंगाजल सा निर्मल मन , मैं मुक्त पवन सा बहता हूँ सीधी सच्ची बात मैं कहता , लाग लपेट ना करता हूँ सत्य सनातन परंपरा में आनंद का अनुभव करता हूँ हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान से बेहद, प्यार मैंदिल से करता हूँ

समीक्षा
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    Anil Sahni "तन्मय"
    03 जुलाई 2021
    बेहतरीन प्रस्तुति इसे जरूर पढ़ें 👇 "💧तेरे घर की सिढ़ियां💧", को प्रतिलिपि पर पढ़ें : https://hindi.pratilipi.com/story/b9cwqzohkoci?utm_source=android&utm_campaign=content_share भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!
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    शानदार और जानदार प्रस्तुति बेहतरीन अभिव्यक्ति बहुत खूब लिखा
  • author
    मीनू वर्मा
    03 जुलाई 2021
    बहुत ही खूबसूरत रचना... बेहतरीन अभिव्यक्ति 👌👌
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    Anil Sahni "तन्मय"
    03 जुलाई 2021
    बेहतरीन प्रस्तुति इसे जरूर पढ़ें 👇 "💧तेरे घर की सिढ़ियां💧", को प्रतिलिपि पर पढ़ें : https://hindi.pratilipi.com/story/b9cwqzohkoci?utm_source=android&utm_campaign=content_share भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!
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    शानदार और जानदार प्रस्तुति बेहतरीन अभिव्यक्ति बहुत खूब लिखा
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    मीनू वर्मा
    03 जुलाई 2021
    बहुत ही खूबसूरत रचना... बेहतरीन अभिव्यक्ति 👌👌