सास की बहू जब से है आई , घर में हमेशा किचकिच सुनाई। बहू हमेशा भागती जाई , कभी आंगन तो कभी द्वार पे पिटाई। गांव वाले भी उसकी करते बुराई, उसकी सच सब ने छुपाई । गलती इतनी की वो करती कमाई, चाहती है ...
अभी तो खुद की तालाश में हूं
जिंदगी बदलने के आस में हूं
सब कहते हैं समझदार बनो लेकिन
सपनों को पाने के लिए पागल बन रही हूं
सब कह रहे हैं हसते रहो पर
सम्मान पाने के लिए मुस्कान खो रही हूं।
सारांश
अभी तो खुद की तालाश में हूं
जिंदगी बदलने के आस में हूं
सब कहते हैं समझदार बनो लेकिन
सपनों को पाने के लिए पागल बन रही हूं
सब कह रहे हैं हसते रहो पर
सम्मान पाने के लिए मुस्कान खो रही हूं।
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