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रोटी और कोरोना...

4.8
148

वर्ष भर से सोचता मैं, देखो कैसी माया है। हाथ मैं जो कुछ बचा था, वो भी मैंने खोया है। देख लो ऐ दुनिया वालों, कैसा यह नजारा है। अपनों का भी साथ छूटा, कौन अब हमारा है। कर्म करता रात दिन जो, रोटी ही ...

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लेखक के बारे में
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योगेश माली

पहली बार प्रयास किया। बस आप लोगों का साथ रहे। 7021548196

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    29 अप्रैल 2021
    वाह... बहुत खूब....!🌹🌹🌹🙏🙏🙏
  • author
    Deepak Rakhi "ठाकुर"
    29 अप्रैल 2021
    अति सुन्दर पंक्तियां लिखी है मित्र।। अति सुन्दर।। हर हर महादेव।।
  • author
    Manju Pant
    30 अप्रैल 2021
    सुंदर सटीक रचना है। 🙏🌹🙏
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    29 अप्रैल 2021
    वाह... बहुत खूब....!🌹🌹🌹🙏🙏🙏
  • author
    Deepak Rakhi "ठाकुर"
    29 अप्रैल 2021
    अति सुन्दर पंक्तियां लिखी है मित्र।। अति सुन्दर।। हर हर महादेव।।
  • author
    Manju Pant
    30 अप्रैल 2021
    सुंदर सटीक रचना है। 🙏🌹🙏