pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

रोज़़ गार्डेन में लड़कियां

3.6
232

वे गुलाब की तरह महक रही हैं वे गुलाब की तरह मुस्कुरा रही हैं इस खुशनुमा हुज़ूम में वे गुलाब गुलाब हुई जा रही हैं। सहेलियां सब एक साथ हैं इस साल अगले साल इनमें से हो जाएंगी कुछ कम पंखुडि़यों की तरह...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

सुपरिचित साहित्यकार। प्रकाशित पुस्तकों में एक उपन्यास 'रेत पर पाँव के निशान', चार कहानी-संग्रह 'सिमटती दूरियां', 'एक अकेली', 'झील में उतरती ठंड' और कबीरा आप ठगाइए। 'कोई अपना' (लघुकथा संग्रह), खिड़की पर छांह (कविता-संग्रह), मूल बांग्ला से हिंदी अनुवाद के अंतर्गत 'बांग्ला की श्रेष्ठ कहानियाँ', 'पेड़ और मनुष्य' (अमर मित्र की कहानियाँ), 'जेल में तीस वर्ष' (एक क्रांतिकारी की आत्मकथा ), बंगाल की प्रसिद्ध 'महाभारत' का हिन्दी में पहला अनुवाद । साथ ही 'हिमाचल की श्रेष्ठ लघुकथाएँ ' (संपादन) , 'लघुकथा हिमाचल ', ओस (संपादन)! विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, लघुकथा, व्यंग्य, बाल-साहित्य, पंजाबी और बांग्ला से अनुवाद, संस्मरण, पर्यटन, लेखादि प्रकाशित और निरंतर लेखन में सक्रिय हैं! संपर्क- ratnesh1859@gmail.com

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    23 মার্চ 2021
    यदि आप शीर्षक देते,,,,,,रोज़ गार्डन में तितलियां तो बेहतर होता,जय भगवान
  • author
    Anurag Dubey
    11 জুলাই 2018
    बेहतरीन 👍👍💐💐
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    23 মার্চ 2021
    यदि आप शीर्षक देते,,,,,,रोज़ गार्डन में तितलियां तो बेहतर होता,जय भगवान
  • author
    Anurag Dubey
    11 জুলাই 2018
    बेहतरीन 👍👍💐💐