रिश्ते न जाने कहाँ खो गये हम मैं और तुम भी मैं हो गये जिंदगी की शाख से जुड़े थे जो फूल न जाने पतझड़ में क्यों खो गये अपने खुद में इतने उलझे कि खुद ही खुदा हो गये जरूरी न था मिलना फिर भी मिलते अब ...

प्रतिलिपिरिश्ते न जाने कहाँ खो गये हम मैं और तुम भी मैं हो गये जिंदगी की शाख से जुड़े थे जो फूल न जाने पतझड़ में क्यों खो गये अपने खुद में इतने उलझे कि खुद ही खुदा हो गये जरूरी न था मिलना फिर भी मिलते अब ...