pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

रस्म

4.6
7365

बर्तन गिरने की आवाज़ से शिखा की आँख खुल गयी। घडी देखी तो आठ बज रहे थे , वह हड़बड़ा कर उठी। "उफ़्फ़ ! मम्मी जी ने कहा था कल सुबह जल्दी उठना है , 'रसोई' की रस्म करनी है, हलवा-पूरी बनाना है... और मैं हूँ कि...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
अनिता ललित

जन्म स्थान -इलाहाबाद (उत्तर-प्रदेश) शिक्षा-परास्नातक (अंग्रेज़ी साहित्य) सम्प्रति-स्वतंत्र लेखन लोपामुद्रा सम्मान-2014 से सम्मानित सृजन की विधाएँ: कविता, क्षणिका, हाइकु , ताँका , सेदोका, चोका, हाइबन, माहिया, आलेख, समीक्षा, कथा, लघुकथा आदि। प्रकाशन: काव्य-संग्रह 'बूँद-बूँद लम्हे’ हाइकु-संग्रह 'चाँदनी की सीपियाँ' प्रकाशित। अभिनव इमरोज़, सरस्वती सुमन, अविराम साहित्यिकी, उदन्ती , समृद्ध सुखी परिवार, हिन्दी चेतना, नामान्तर, सादर इंडिया, वीणा, अहा! ज़िंदगी, साहित्य कुंज, संरचना, सर्जना, भास्करभूमि (राजनांदगाँव ), दैनिक जागरण, स्वतंत्र भारत, अनुभूति, समय, आधुनिक साहित्य, सरिता, लघुकथा.कॉम, कविता कोश, गर्भनाल, 'शोध दिशा' लघुकथा विशेषांक आदि। नेपाल से प्रकाशित होने वाली नेवा: हाइकु पत्रिका में हाइकु प्रकाशित। प्रथम चोका-संग्रह 'उजास साथ रखना' में चोका प्रकाशित। 'आधी आबादी का आकाश' एवं 'हिंदी हाइकु प्रकृति काव्य कोष' में हाइकु प्रकाशित। 'हाइकु-व्योम' में हाइकु प्रकाशित। 'हाइकु-काव्य शिल्प एवं अनुभूति' में लेख प्रकाशित। 'कविता अनवरत' (खण्ड 3) में कविताएँ प्रकाशित।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    dinesh pradhan
    19 नवम्बर 2020
    kahani h ye real me kaha esa hota h agar hota to sach me bahot achchha hota sas bhi bahu ko beti samjhti to phir bahu bhi ghar me bahut khus hoti n ki khus hone ka dikhava karti.
  • author
    रमाकान्त राठौर
    10 अगस्त 2020
    बहुत अच्छी कहानी है ।कोई भी लड़की पहली बार ससुराल जाती है ,तो लड़की की माँ या दादी और भी कई रिश्तेदार महिलाएं उसके मन में यह सास नामका हौव्वा भर देते हैं कि उसके मन पहले ही सास के प्रति कटुता भर जाती है ।सब सास ऐसी नहीं होती है ।
  • author
    13 जून 2020
    अति उत्तम अभिव्यक्ति । यदि भारतवर्ष में ऐसा होने लग जाये तो डेली सोप वालो की तो शामत आजायेगी। 😊😊😊
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    dinesh pradhan
    19 नवम्बर 2020
    kahani h ye real me kaha esa hota h agar hota to sach me bahot achchha hota sas bhi bahu ko beti samjhti to phir bahu bhi ghar me bahut khus hoti n ki khus hone ka dikhava karti.
  • author
    रमाकान्त राठौर
    10 अगस्त 2020
    बहुत अच्छी कहानी है ।कोई भी लड़की पहली बार ससुराल जाती है ,तो लड़की की माँ या दादी और भी कई रिश्तेदार महिलाएं उसके मन में यह सास नामका हौव्वा भर देते हैं कि उसके मन पहले ही सास के प्रति कटुता भर जाती है ।सब सास ऐसी नहीं होती है ।
  • author
    13 जून 2020
    अति उत्तम अभिव्यक्ति । यदि भारतवर्ष में ऐसा होने लग जाये तो डेली सोप वालो की तो शामत आजायेगी। 😊😊😊