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रस्क खाता लाचार आदमी ....

4.4
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एक सरकारी अस्पताल के सामने चाय की थड़ी पर दबाये हुए बगल में कुछ रिपोर्ट्स और दवाइयाँ चाय में डुबो रस्क खाता एक लाचार आदमी ! चार दिनों से यही खा भूख से लड़ता हुआ जनरल वार्ड में भर्ती माँ के इलाज़ के लिए ...

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लेखक के बारे में
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इरा टाक

इरा टाक का परिचय- इरा टाक लेखक, चित्रकार और फिल्मकार हैं। बीकानेर में जन्मी इरा टाक बीएससी, एमए (इतिहास ), और मास कम्युनिकेशन में स्नातकोतर डिप्लोमा हासिल किये हुए हैं। जयपुर की इरा, वर्तमान में मुंबई रह कर अपनी रचनात्मक यात्रा में लगी हैं। वे भारत में हिंदी ऑडियो स्टोरी की दुनिया में लेखक के रूप में जाना पहचाना नाम है। अभी हाल ही में पेंगुइन रैंडम हाउस- हिंद पॉकेट बुक्स से उनका नॉवेल लव ड्रग रिलीज हुआ है. उनकी लेखकीय यात्रा में पड़ाव हैं: तीन काव्य संग्रह - अनछुआ ख़्वाब, मेरे प्रिय, कैनवस पर धूप , कहानी संग्रह - रात पहेली, चाँद पास है, नॉवेल - लव ड्रग (Penguin Random house- Hind pocket books), रिस्क @ इश्क़, मूर्ति , ऑडियो नावेल (Storytel)- गुस्ताख इश्क, प्यार के इस खेल में, ऑडियो बुक्स- मेरे हमनफ़स, ये मुलाक़ात एक बहाना है, किलर ऑन हंट, रिज़र्व सीट, पटरी पर इश्क़, रंगरेज़ पिया आदि (Storytel)। लाइफ लेसन बुक्स- लाइफ सूत्र और RxLove366. फिल्ममेकर के रूप में चार शॉर्ट फिक्शन फिल्म्स - फ्लर्टिंग मैनिया, डब्लू टर्न, इवन दा चाइल्ड नोज और रेनबो उनके खाते में दर्ज़ हैं। इस समय वो बॉलीवुड में पटकथा (script writing) लेखन कर रहीं हैं। चित्रकार के रूप में वे दस एकल प्रदर्शनियां कर चुकी हैं।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Saurabh Srivastava
    14 फ़रवरी 2016
    ek maarmik kavita.. jo is baat ki mohtaaj nahin ki shri Upadhyay usey praasangik maane ya na maane.. ek aam graamin ki behaali aur laachaari ko abhivyakti deti hai yeh kavita aur beshak Hindi mein likhi hui bhi hai.. Upadhyay ji ki Rashtrabhasha sambhavtaya Rajbhasha Vibhag ke Sanskritnishtha shabdon ke bojh tale dab kar na to kavita ki bhasha rah gayi na hi abhivyakti ki.. Era ji achhi kavita hai, meri shubhkamnaayen.  
  • author
    Lalit Mohan
    12 अक्टूबर 2015
    बहुत सुन्दर चित्रण  दिल को छू गयी  
  • author
    Rajan
    23 फ़रवरी 2017
    बेहतरीन
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  • author
    Saurabh Srivastava
    14 फ़रवरी 2016
    ek maarmik kavita.. jo is baat ki mohtaaj nahin ki shri Upadhyay usey praasangik maane ya na maane.. ek aam graamin ki behaali aur laachaari ko abhivyakti deti hai yeh kavita aur beshak Hindi mein likhi hui bhi hai.. Upadhyay ji ki Rashtrabhasha sambhavtaya Rajbhasha Vibhag ke Sanskritnishtha shabdon ke bojh tale dab kar na to kavita ki bhasha rah gayi na hi abhivyakti ki.. Era ji achhi kavita hai, meri shubhkamnaayen.  
  • author
    Lalit Mohan
    12 अक्टूबर 2015
    बहुत सुन्दर चित्रण  दिल को छू गयी  
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    Rajan
    23 फ़रवरी 2017
    बेहतरीन