तूंही निरंकार, मैं तेरी शरण हां, मैनूं बख़्श लओ
🌷🌹"लेखन-लेखनी"🌹🌷
लेखन-शैली लेखनी मनवा, कितने ही अल्फ़ाज़ छुपाए बैठी है।
लेखन श्रंगार से हो ओतप्रोत, और कितने राज़ छुपाए बैठी है।
गुरूकृपा व लेखनी संगम,'मोहन' दिव्य अंदाज़ छुपाए बैठी है।
अल्फ़ाज़ों की अनहद सुर लहरी, यूं गहरे साज़ छुपाए बैठी है।
🌺शुकर ऐ मेरे रहबरां...🌺
🙏धन निरंकार जी🙏
रिपोर्ट की समस्या
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