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रहीम के सवैये

4.6
656

जाति हुती सखि गोहन में मन मोहन कों लखिकै ललचानो । नागरि नारि नई ब्रज की उनहूँ नूंदलाल को रीझिबो जानो ।। जाति भई फिरि कै चितई तब भाव 'रहीम' यहै उर आनो । ज्‍यों कमनैत दमानक में फिरि तीर सों मारि लै जात ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना उपनाम : रहीम जन्म : 1556, लाहौर देहावसान: 1627, आगरा भाषा : ब्रजभाषा, अवधी, संस्कृत विधाएँ : दोहा, सोरठा, बरवै, सवैया अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना जो कि अपने उपनाम रहीम के नाम से विख्यात रहे हैं, मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक हैं, ये भारत की गंगा-जमुनी तहजीब के सर्वर्श्रेठ उदाहरणों में से एक हैं. रहीम ने ब्रजभाषा, पूर्वी अवधी, संस्कृत और खड़ी बोली में अनेक दोहों, सोरठों, सवैयों वगैरा की रचना की है. रहीम एक साहित्यकार होने के साथ साथ ज्योतिष, दानवीर, बहुभाषाविद्, एवम प्रशासक भी थे|

समीक्षा
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  • author
    Suraj Kumar
    18 नवम्बर 2021
    इंसान को पसंद इंसान को पसंद करने के लिए उसकी इच्छा की जानकारी होनी चाहिए यह भी जानता हूं कि अपने जीवन में अलग-अलग प्रकार की अपनी व्याख्या किया हूं
  • author
    RamChandra Dwivedi
    10 जून 2024
    रहीम के सवैये भी काफी भाव पूर्ण और प्रवाहमय हैं। इन्हे पढ़कर मन खुश हो गया।
  • author
    Manjit Singh
    09 जुलाई 2020
    brijbhasha va avdhi me likhe dohe sunder hei
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    Suraj Kumar
    18 नवम्बर 2021
    इंसान को पसंद इंसान को पसंद करने के लिए उसकी इच्छा की जानकारी होनी चाहिए यह भी जानता हूं कि अपने जीवन में अलग-अलग प्रकार की अपनी व्याख्या किया हूं
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    RamChandra Dwivedi
    10 जून 2024
    रहीम के सवैये भी काफी भाव पूर्ण और प्रवाहमय हैं। इन्हे पढ़कर मन खुश हो गया।
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    Manjit Singh
    09 जुलाई 2020
    brijbhasha va avdhi me likhe dohe sunder hei